चेन्नई सुपर किंग्स ने उन खबरों का खंडन किया है, जिनमें दावा किया गया था कि पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी टीम में बड़ी हिस्सेदारी खरीदने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। बताया गया है कि धोनी के पास पहले से ही चेन्नई सुपर किंग्स से जुड़ी कंपनी के एक लाख से अधिक शेयर मौजूद हैं। इन शेयरों की संख्या सुनने में बड़ी लग सकती है, लेकिन कंपनी में उनकी वास्तविक हिस्सेदारी बेहद छोटी है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, महेंद्र सिंह धोनी ने ये शेयर अतीत में निजी तौर पर खरीदे थे। बताया जाता है कि उनके पास एक लाख से अधिक शेयर हैं। कंपनी के अनुमानित शेयर स्वामित्व के आधार पर उनकी हिस्सेदारी लगभग 0.01 से 0.02 प्रतिशत के बीच बैठती है। यानी इतने अधिक शेयर होने के बावजूद टीम पर उनके स्वामित्व का प्रतिशत बहुत कम है।
इसके मुकाबले श्रीनिवासन परिवार के पास कंपनी में 55 प्रतिशत से अधिक की निर्णायक हिस्सेदारी बताई जाती है। वहीं सार्वजनिक निवेशकों के पास 30 करोड़ से अधिक शेयर हैं, जो कुल हिस्सेदारी का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं। ऐसे में धोनी की हिस्सेदारी कंपनी के कुल स्वामित्व की तुलना में बहुत छोटी है।
धोनी की हिस्सेदारी कितनी मूल्यवान हो सकती है?
इंडियन प्रीमियर लीग की टीमों के मौजूदा अनुमानित मूल्य को देखते हुए धोनी की हिस्सेदारी का संभावित मूल्य लगभग ढाई से तीन करोड़ रुपये के आसपास हो सकता है। हाल में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और राजस्थान रॉयल्स की बिक्री करीब 16,000 करोड़ रुपये के मूल्यांकन के आसपास होने की खबरों के बाद लीग की प्रमुख टीमों के मूल्य को लेकर चर्चा और तेज हुई है।
हालांकि, यह अनुमानित मूल्य है और इसे धोनी की हिस्सेदारी का आधिकारिक बाजार मूल्य नहीं माना जा सकता। इसका एक महत्वपूर्ण कारण यह है कि चेन्नई सुपर किंग्स से जुड़ी कंपनी के शेयर आम शेयर बाजार में खुले तौर पर खरीदे-बेचे नहीं जाते। इसलिए उनकी वास्तविक कीमत सार्वजनिक बाजार में प्रतिदिन तय नहीं होती।
पिछले कुछ समय से ऐसी खबरें सामने आ रही थीं कि महेंद्र सिंह धोनी चेन्नई सुपर किंग्स में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर लगभग 15 से 20 प्रतिशत करने की कोशिश कर रहे हैं। अगर ऐसा होता, तो टीम में उनकी आर्थिक भागीदारी और प्रभाव दोनों काफी बढ़ जाते। इतनी बड़ी हिस्सेदारी उन्हें कंपनी के महत्वपूर्ण फैसलों में कहीं अधिक प्रभावशाली स्थिति प्रदान कर सकती थी।
हालांकि, चेन्नई सुपर किंग्स ने ऐसी किसी बातचीत से इनकार किया है। टीम की ओर से सार्वजनिक रूप से और अनौपचारिक स्तर पर भी इस तरह की किसी चर्चा की पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए फिलहाल धोनी के पास पहले से मौजूद छोटी हिस्सेदारी ही इस मामले में पुष्ट जानकारी के रूप में सामने आती है।
हिस्सेदारी छोटी, लेकिन प्रभाव बड़ा
महेंद्र सिंह धोनी की वास्तविक हिस्सेदारी भले ही बहुत कम हो, लेकिन चेन्नई सुपर किंग्स में उनका प्रभाव केवल शेयरों के आधार पर नहीं देखा जाता। वह इस टीम की पहचान से गहराई से जुड़े हुए हैं। टीम के सबसे सफल खिलाड़ियों में शामिल होने के साथ-साथ वह लंबे समय तक उसके कप्तान भी रहे हैं।
धोनी के नेतृत्व में चेन्नई सुपर किंग्स ने कई महत्वपूर्ण सफलताएं हासिल कीं और वह टीम के सबसे लोकप्रिय चेहरों में शामिल रहे। इसी वजह से मैदान पर उनकी भूमिका से आगे भी उनकी राय को महत्व दिए जाने की चर्चा होती रहती है।
उनका प्रभाव खास तौर पर क्रिकेट से जुड़े फैसलों में दिखाई देता है। टीम में नए प्रशिक्षक की नियुक्ति से लेकर खिलाड़ियों के चयन और संभावित बदलावों तक उनके अनुभव को महत्वपूर्ण माना जाता है। स्टीफन फ्लेमिंग के टीम से अलग होने के बाद नए प्रशिक्षक को लेकर भी धोनी की भूमिका पर काफी चर्चा हुई है।
नए प्रशिक्षक और खिलाड़ियों को लेकर अहम भूमिका
चेन्नई सुपर किंग्स के लिए आने वाला सत्र कई मायनों में महत्वपूर्ण हो सकता है। स्टीफन फ्लेमिंग के जाने के बाद टीम को नए प्रशिक्षक की जरूरत है। ऐसे में धोनी का अनुभव टीम प्रबंधन के लिए उपयोगी माना जा रहा है।
इसके अलावा आगामी नीलामी से पहले खिलाड़ियों की अदला-बदली और टीम संयोजन को लेकर भी कई फैसले किए जाने हैं। धोनी लंबे समय से टीम की जरूरतों और खिलाड़ियों की क्षमताओं को करीब से देखते रहे हैं। इसलिए क्रिकेट से जुड़े मामलों में उनकी राय को महत्व मिलना स्वाभाविक माना जा रहा है।
पिछले सत्र में चोट के कारण धोनी मैदान पर कोई मुकाबला नहीं खेल पाए थे। इसके बावजूद ऐसी चर्चाएं थीं कि वह पर्दे के पीछे टीम से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में सक्रिय बने हुए थे। इससे यह स्पष्ट होता है कि उनका प्रभाव केवल खिलाड़ी के रूप में मैदान तक सीमित नहीं है।
कप्तान रुतुराज गायकवाड़ के साथ तालमेल अहम
आने वाले सत्र में एक और महत्वपूर्ण पहलू कप्तान रुतुराज गायकवाड़ और धोनी के बीच तालमेल होगा। गायकवाड़ अब टीम की कप्त


