भारत और जापान के बीच मंगलवार को खेले गए वर्षा से प्रभावित एकमात्र टी20 मुकाबले का अंत बेहद रोमांचक रहा। भारत ने जापान को केवल दो रन से हराकर मुकाबला अपने नाम किया, लेकिन अंतिम ओवर में बदले गए एक फैसले ने मैच के दौरान विवाद की स्थिति पैदा कर दी। जापान की पारी के आखिरी ओवर में पहले वाइड दिए गए एक गेंद को बाद में मृत गेंद घोषित कर दिया गया। इसके साथ ही जापान को मिलने वाला अतिरिक्त रन भी वापस ले लिया गया।
यह घटना जापान की लक्ष्य का पीछा करती पारी के अंतिम छह गेंदों में सामने आई। जापान को जीत के लिए छह गेंदों में आठ रन की जरूरत थी। भारत की ओर से अक्षर पटेल अंतिम ओवर डाल रहे थे। ओवर की तीसरी गेंद उन्होंने बल्लेबाज अलेक्जेंडर शिराई-पैटमोर की ओर पैर की दिशा में फेंकी। बल्लेबाज ने उलटा प्रहार करने की कोशिश की, लेकिन गेंद उनके बल्ले से नहीं लगी।
मैदानी अंपायर क्रिस थर्गेट ने इस गेंद को वाइड करार दिया। इस फैसले के बाद भारतीय खिलाड़ी इससे सहमत नजर नहीं आए। भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर को दूसरे अंपायर क्रिस ब्राउन से बातचीत करते हुए देखा गया। इसके बाद दोनों अंपायरों ने आपस में चर्चा की और प्रारंभिक फैसले को बदलते हुए गेंद को मृत घोषित कर दिया।
इस फैसले के बदलने का सीधा असर जापान के स्कोर पर पड़ा। वाइड के रूप में दिया गया अतिरिक्त रन जापान के खाते से हटा दिया गया। मुकाबला अंत में केवल दो रन के अंतर से भारत के पक्ष में गया, इसलिए अंतिम ओवर का यह फैसला मैच के नतीजे के संदर्भ में महत्वपूर्ण बन गया।
बारिश के कारण मुकाबले को पांच-पांच ओवर तक सीमित कर दिया गया था। मैदान पर मौजूद नमी के कारण गेंद को उम्मीद से अधिक घूमने में मदद मिली। ऐसे में भारत और जापान के बीच अनुभव तथा क्षमता का अंतर भी मैदान पर उतना स्पष्ट नहीं दिखाई दिया, जितनी सामान्य परिस्थितियों में उम्मीद की जा सकती थी।
भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए पांच ओवर में चार विकेट पर केवल 32 रन बनाए। भारतीय बल्लेबाजों को जापानी गेंदबाजों के सामने रन बनाने में काफी कठिनाई हुई। भारतीय पारी में केवल तीन चौके लग सके। पिच पर मौजूद नमी के कारण गेंद के घूमने से बल्लेबाजों के लिए गेंद को उसकी दिशा के विपरीत मारना मुश्किल हो रहा था।
भारत के लिए पारी की शुरुआत करने आए अभिषेक शर्मा खाता खोले बिना आउट हो गए। बाएं हाथ के स्पिन गेंदबाज चार्ली हारा-हिन्जे ने उन्हें अपना शिकार बनाया। अभिषेक ने गेंद को जोर से मारने के लिए उलटा प्रहार करने का प्रयास किया, लेकिन उनका शॉट सही तरह से नहीं लगा और गेंद क्षेत्ररक्षक के हाथों में चली गई।
इसके बाद संजू सैमसन भी बड़ी पारी नहीं खेल सके। उन्होंने 10 रन बनाए। इब्राहिम ताकाहाशी ने गेंद को हवा में उछालकर ऐसा मोड़ दिया कि सैमसन अपने प्रहार में पूरी तरह नियंत्रण नहीं रख सके। गेंद सीमा रेखा के पास खड़े क्षेत्ररक्षक के हाथों में चली गई।
ईशान किशन भी केवल तीन रन बनाकर पवेलियन लौट गए। जापानी गेंदबाज बेंजामिन इटो-डेविस ने उनका विकेट हासिल किया। ईशान लगातार गेंद के घूमने की दिशा के विपरीत प्रहार करने की कोशिश कर रहे थे। इसी प्रयास में उनका शॉट हवा में उठ गया और गेंद सीधे क्षेत्ररक्षक के पास चली गई।
भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर ने 16 रन बनाकर टीम को कुछ सहारा दिया। उन्होंने एक चौका भी लगाया, लेकिन पिच की स्थिति ऐसी थी कि भारतीय बल्लेबाजों के लिए गेंद को सामने की दिशा में मारना अधिक सुरक्षित नजर आ रहा था। गेंद के असमान व्यवहार और अतिरिक्त घूमाव के कारण बड़े प्रहार करना जोखिम भरा साबित हो रहा था।
जापान की ओर से चार्ली हारा-हिन्जे ने दो विकेट लेकर भारतीय बल्लेबाजी पर दबाव बनाया। इब्राहिम ताकाहाशी ने भी एक महत्वपूर्ण विकेट हासिल किया, जबकि बेंजामिन इटो-डेविस ने ईशान किशन को आउट करके भारतीय पारी को और मुश्किल में डाल दिया।
32 रन के छोटे लक्ष्य का बचाव करना भारत के लिए आसान नहीं था। जापान ने लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय गेंदबाजों पर दबाव बनाए रखा। रवि बिश्नोई के एक ओवर में जापान ने 10 रन जुटा लिए, जिससे भारतीय खेमे की चिंता बढ़ गई।
इसके बाद वॉशिंगटन सुंदर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने दो विकेट हासिल किए और अपने अंतिम ओवर में 13 रन देकर जापान को लक्ष्य के करीब पहुंचने से रोकने की कोशिश की। इसके बावजूद जापान अंतिम ओवर में केवल आठ रन दूर था और मुकाबला पूरी तरह खुला हुआ था।
अक्षर पटेल ने निर्णायक क्षण में अपने अनुभव का इस्तेमाल किया। अंतिम ओवर में उन्होंने शिराई-पैटमोर और बेंजामिन इटो-डेविस को खुलकर प्रहार करने के लिए पर्याप्त जगह नहीं दी। गेंदों की दिशा और गति पर नियंत्रण रखते हुए उन्होंने जापानी बल्लेबाजों को बड़े शॉट खेलने से रोकने का प्रयास किया।
बारिश के कारण मैदान का बाहरी हिस्सा भी धीमा हो गया था। ऐसे में गेंद को सीमा रेखा तक पहुंचाना आसान नहीं था। अंतिम ओवर में जापान को आठ रन की जरूरत होने के बावजूद भारतीय गेंदबाजी और धीमे मैदान ने उसके बल्लेबाजों के लिए परिस्थितियां कठिन बनाए रखीं।
आखिरकार जापान निर्धारित पांच ओवरों में भारत के लक्ष्य से दो रन पीछे रह गया। भारत ने बेहद करीबी मुकाबले में जीत हासिल की, लेकिन अंतिम ओवर में वाइड से जुड़ा बदला हुआ फैसला चर्चा का विषय बन गया। मैच की परिस्थितियों, पिच की नमी और सीमित ओवरों के कारण दोनों टीमों के बीच मुकाबला उम्मीद से कहीं अधिक प्रतिस्पर्धी रहा।
यह मुकाबला जापान के लिए भी महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि उसके स्पिन गेंदबाजों ने मजबूत भारतीय बल्लेबाजी क्रम को काफी हद तक रोकने में सफलता हासिल की। वहीं भारत को छोटे लक्ष्य का बचाव करने के लिए अंतिम गेंदों तक संघर्ष करना पड़ा। अंततः अक्षर पटेल और भारतीय गेंदबाजों के अनुभव ने टीम को दो रन की करीबी जीत दिलाई।


