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आंध्र प्रदेश में चौबीसों घंटे बिजली आपूर्ति की नई योजना तैयार

अमरावती, 8 सितंबर: आंध्र प्रदेश सरकार ने राज्य में चौबीसों घंटे निर्बाध और भरोसेमंद बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए व्यापक ऊर्जा योजना तैयार की है। सरकार का उद्देश्य आने वाले वर्षों में बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने के साथ-साथ बिजली व्यवस्था को मौसम की चरम परिस्थितियों से भी सुरक्षित बनाना है।

ऊर्जा विभाग के विशेष मुख्य सचिव के. विजयानंद के अनुसार, इस योजना के तहत 1,600 मेगावाट ताप विद्युत की खरीद की जाएगी। इसके अलावा 2,000 मेगावाट से अधिक क्षमता वाली उन्नत बैटरी ऊर्जा भंडारण और पंप जलविद्युत भंडारण परियोजनाओं को विकसित किया जाएगा।

सरकार का मानना है कि इन योजनाओं से बिजली की सबसे अधिक मांग वाले समय में होने वाली कमी को दूर करने में मदद मिलेगी। साथ ही बिजली खरीद की लागत कम करने और राज्य की संपूर्ण विद्युत व्यवस्था को अधिक स्थिर बनाने में भी सहायता मिलेगी।

बढ़ती मांग को देखते हुए ताप विद्युत की खरीद

भविष्य में बिजली की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 63 के तहत 1,600 मेगावाट ताप विद्युत खरीदने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी। इसके लिए प्रतिस्पर्धी दर आधारित निविदा प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

इस व्यवस्था के तहत देशभर की बिजली उत्पादन कंपनियां भाग ले सकेंगी। सरकार का लक्ष्य राज्य की सीमा तक बिजली पहुंचने की अंतिम लागत को यथासंभव कम रखना है।

दीर्घकालिक आधार पर बिजली खरीद की अवधि 12 से 25 वर्ष तक रखी जा सकती है। परियोजनाओं के लिए निर्माण, वित्तपोषण, स्वामित्व और संचालन की जिम्मेदारी संबंधित विकासकर्ताओं की होगी।

कोयले के भंडार को लेकर सख्त व्यवस्था

बिजली उत्पादन के लिए ईंधन की अचानक कमी न हो, इसके लिए नई व्यवस्था में कोयले का अनिवार्य भंडार बढ़ाया गया है। बिजली उत्पादन करने वाली कंपनियों को कम से कम 15 दिनों का कोयला भंडार बनाए रखना होगा। इससे पहले सात दिनों के भंडार की व्यवस्था थी।

सरकार का कहना है कि इस अतिरिक्त भंडार से ईंधन आपूर्ति में अचानक रुकावट आने की स्थिति में बिजली उत्पादन प्रभावित होने से बचाया जा सकेगा।

इसके अलावा परियोजना विकासकर्ताओं को प्रदर्शन संबंधी बैंक गारंटी भी देनी होगी। इसका उद्देश्य बिजली आपूर्ति की समयसीमा और अनुबंध संबंधी दायित्वों को सख्ती से लागू करना है।

अल नीनो की चुनौती से निपटने की तैयारी

ऊर्जा विभाग के अनुसार, अल नीनो जैसी मौसम संबंधी परिस्थितियों का बिजली की मांग और उपलब्धता पर प्रभाव पड़ सकता है। ऐसी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आंध्र प्रदेश बिजली उत्पादन निगम को आयातित कोयले का इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई है।

हालांकि, आयातित कोयले की खरीद पारदर्शी प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया के माध्यम से करनी होगी। इसका उद्देश्य बिजली उत्पादन के लिए आवश्यक ईंधन की उपलब्धता बनाए रखना और खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।

ऊर्जा विभाग ने बिजली वितरण कंपनियों को भी अगले सितंबर तक की अवधि के लिए 12 महीने पहले से बिजली आपूर्ति की विस्तृत योजना तैयार करने का निर्देश दिया है। इससे भविष्य में बिजली की मांग और उपलब्धता के बीच बेहतर तालमेल बनाने में सहायता मिलने की उम्मीद है।

दिन की सौर ऊर्जा बचाकर शाम को होगी आपूर्ति

राज्य सरकार बिजली भंडारण क्षमता बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दे रही है। दिन के समय सौर ऊर्जा का उत्पादन अधिक होने पर कई बार पूरी बिजली का उपयोग तत्काल नहीं हो पाता। सरकार इस अतिरिक्त ऊर्जा को बैटरी में सुरक्षित रखने और शाम के समय बिजली की मांग बढ़ने पर उसका इस्तेमाल करने की योजना पर काम कर रही है।

इसके तहत 1,500 मेगावाट क्षमता वाली बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली विकसित की जा रही है, जिसकी कुल भंडारण क्षमता 6,000 मेगावाट-घंटा होगी।

इस योजना के तहत 500 मेगावाट और 2,000 मेगावाट-घंटा क्षमता की एक परियोजना गोदावरी गैस बिजली संयंत्र के परिसर में स्थापित की जाएगी।

इसी तरह 500 मेगावाट और 2,000 मेगावाट-घंटा क्षमता की दूसरी परियोजना तालारिचेरुवु तथा चयनित बिजली वितरण उपकेंद्रों के आसपास विकसित की जाएगी। तीसरी समान क्षमता वाली परियोजना प्रमुख सौर और पवन ऊर्जा केंद्रों पर सीधे स्थापित की जाएगी।

अतिरिक्त भंडारण परियोजना भी आगे बढ़ी

सरकार एक अतिरिक्त 500 मेगावाट और 1,000 मेगावाट-घंटा क्षमता वाली ऊर्जा भंडारण परियोजना को भी आगे बढ़ा रही है। यह परियोजना केंद्र सरकार की व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण योजना के अंतर्गत राष्ट्रीय जलविद्युत निगम के साथ साझेदारी में आगे बढ़ाई जा रही है।

इन भंडारण परियोजनाओं का उद्देश्य केवल अतिरिक्त बिजली को सुरक्षित रखना नहीं है, बल्कि मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखना भी है। विशेष रूप से शाम के समय बिजली की मांग बढ़ने पर संग्रहीत ऊर्जा का उपयोग किया जा सकता है।

पंप जलविद्युत भंडारण पर भी जोर

आंध्र प्रदेश सरकार दीर्घकालिक ऊर्जा भंडारण के लिए पंप जलविद्युत भंडारण परियोजनाओं पर भी काम कर रही है। राज्य लगभग 40 वर्ष की लंबी अवधि वाली 1,344 मेगावाट क्षमता की ऐसी परियोजना का मूल्यांकन कर रहा है।

इसके साथ ही तत्काल विद्युत व्यवस्था की जरूरतों को पूरा करने के लिए 500 मेगावाट की अल्पकालिक पंप भंडारण सेवा के लिए निविदा निकालने की तैयारी भी की जा रही है। इस सेवा की अवधि चार वर्ष होगी।

सरकार इसके लिए आंध्र प्रदेश विद्युत नियामक आयोग से आवश्यक अनुमति लेने की प्रक्रिया में है।

अगस्त में बिजली की खपत 20 प्रतिशत बढ़ी

के. विजयानंद के अनुसार, अल नीनो से जुड़ी गंभीर मौसम परिस्थितियों के बीच अगस्त में राज्य की औसत दैनिक बिजली खपत पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 20 प्रतिशत बढ़कर 269 मिलियन इकाई पहुंच गई।

दैनिक अधिकतम मांग भी 286 मिलियन इकाई तक पहुंची। सितंबर में राज्य की बिजली मांग बढ़कर लगभग 14,150 मेगावाट तक पहुंचने का अनुमान है।

बढ़ती बिजली मांग के पीछे घरेलू उपयोग, कृषि, उद्योग और अन्य आर्थिक गतिविधियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। ऐसे में सरकार पहले से बिजली उत्पादन, खरीद और भंडारण की क्षमता बढ़ाने की तैयारी कर रही है।

किसानों, उद्योगों और घरों को राहत का दावा

सरकार के अनुसार, इस व्यापक ऊर्जा योजना से कृषि क्षेत्र को निर्बाध निःशुल्क बिजली उपलब्ध कराने, उद्योगों को भरोसेमंद विद्युत आपूर्ति देने और घरेलू उपभोक्ताओं के लिए लगातार बिजली सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

राज्य सरकार का जोर केवल बिजली उत्पादन बढ़ाने पर नहीं है, बल्कि उत्पादन, भंडारण और वितरण के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी है। सौर और पवन ऊर्जा जैसी बदलती प्रकृति वाली ऊर्जा के बढ़ते उपयोग के साथ ऊर्जा भंडारण व्यवस्था भविष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

सरकार का मानना है कि उन्नत तकनीक और बड़े पैमाने पर ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं के एकीकरण से आंध्र प्रदेश की विद्युत व्यवस्था अत्यधिक मौसम संबंधी चुनौतियों के प्रति अधिक मजबूत होगी।

कुल मिलाकर, आंध्र प्रदेश सरकार की नई ऊर्जा योजना का लक्ष्य तत्काल बिजली जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ आने वाले वर्षों के लिए मजबूत और स्थिर विद्युत ढांचा तैयार करना है। 1,600 मेगावाट ताप विद्युत की खरीद, बड़े पैमाने पर बैटरी भंडारण, पंप जलविद्युत परियोजनाएं और पहले से बिजली आपूर्ति की योजना राज्य की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों से निपटने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।

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