पाकिस्तान में प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़े एक वरिष्ठ कमांडर कारी सईद उर्फ अब्दुल अजीज की मौत हो गई है। रिपोर्टों के मुताबिक, कारी सईद इस्लामाबाद स्थित LeT की मस्जिद क़ुबा में नमाज के लिए पहुंचा था, जहां अचानक गिरने के बाद उसकी हालत बिगड़ गई। मौके पर मौजूद लोगों ने उसे बचाने की कोशिश की और CPR भी दिया, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी। बाद में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
कारी सईद की मौत की परिस्थितियों को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक और विस्तृत चिकित्सकीय जानकारी सामने नहीं आई है। उपलब्ध रिपोर्टों में उसकी मौत को रहस्यमय परिस्थितियों में हुई घटना के तौर पर बताया गया है। CCTV फुटेज में उसके अचानक गिरने की घटना कैद होने की बात कही गई है।
नमाज के लिए मस्जिद पहुंचा था कारी सईद
रिपोर्ट के अनुसार, कारी सईद एक बैग लेकर इस्लामाबाद स्थित LeT की मस्जिद क़ुबा पहुंचा था। CCTV फुटेज में कथित तौर पर देखा गया कि मस्जिद पहुंचने के बाद उसने अपना बैग एक सहयोगी को सौंप दिया। इसके बाद उसने नमाज से पहले वुजू किया।
वुजू पूरा करने के बाद कारी सईद ने अपना बैग वापस लिया और मुख्य नमाज हॉल की ओर जाने के लिए सीढ़ियां चढ़ने लगा। इसी दौरान वह बैठकर अपनी चप्पल उतारने की कोशिश करता दिखाई देता है। अचानक वह फर्श पर गिर पड़ा।
मस्जिद में मौजूद अन्य LeT सदस्यों ने उसे उठाया और दूसरी जगह ले गए। रिपोर्ट के मुताबिक, जब उसकी सांस रुकने जैसी स्थिति दिखाई दी, तब वहां मौजूद लोगों ने CPR देकर उसे पुनर्जीवित करने का प्रयास किया। काफी कोशिशों के बावजूद उसे होश नहीं आया। इसके बाद उसे अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।
1990 से हाफिज सईद के साथ जुड़ा होने का दावा
रिपोर्टों के मुताबिक, कारी सईद उर्फ अब्दुल अजीज का संबंध लश्कर-ए-तैयबा प्रमुख हाफिज सईद से वर्ष 1990 से बताया जाता है। उसे हाफिज सईद के करीबी कमांडरों में शामिल बताया गया है। शुरुआती दौर में उसकी भूमिका संगठन के लिए आतंकियों की भर्ती से जुड़ी होने की बात सामने आई है।
बताया जाता है कि कारी सईद वर्ष 2017 तक सक्रिय आतंकी गतिविधियों से जुड़ा रहा। इसके बाद संगठन के भीतर उसे प्रशासनिक जिम्मेदारियां सौंपे जाने की बात कही गई। इन जिम्मेदारियों में दक्षिण पंजाब क्षेत्र से जुड़े मामलों का प्रबंधन भी शामिल था।
आतंकियों के परिवारों को मासिक पेंशन देने की जिम्मेदारी
कारी सईद की सबसे अहम कथित जिम्मेदारियों में से एक उन आतंकियों के परिवारों तक आर्थिक सहायता पहुंचाना था, जो भारत में मारे गए थे। रिपोर्टों के अनुसार, वह LeT के Shoaba-e-Warasa-e-Shuhada विभाग में दक्षिण पंजाब इकाई का प्रमुख था।
इस विभाग का कथित उद्देश्य मारे गए आतंकियों के परिवारों से जुड़े मामलों को देखना था। कारी सईद पर दक्षिण पंजाब के विभिन्न जिलों में रहने वाले ऐसे परिवारों को मासिक पेंशन पहुंचाने की जिम्मेदारी होने का दावा किया गया है।
इन जिलों में मुल्तान, बहावलपुर और डेरा गाजी खान जैसे क्षेत्र शामिल बताए जाते हैं। रिपोर्टों के अनुसार, वह इन इलाकों से जुड़े आतंकियों की सूची तैयार करने और उनके परिवारों से संबंधित रिकॉर्ड संभालने का काम भी करता था।
संगठन के प्रशासनिक ढांचे में निभाई भूमिका
कारी सईद का कथित करियर यह भी दर्शाता है कि आतंकवादी संगठनों में केवल हथियारबंद गतिविधियों से जुड़े लोग ही महत्वपूर्ण भूमिका नहीं निभाते। ऐसे संगठनों में भर्ती, वित्तीय सहायता, रिकॉर्ड तैयार करना और परिवारों से संपर्क जैसे प्रशासनिक कार्य भी संगठनात्मक ढांचे का हिस्सा हो सकते हैं।
कारी सईद के मामले में भी रिपोर्टों में दावा किया गया है कि सक्रिय आतंकी गतिविधियों से पीछे हटने के बाद उसे संगठन के प्रशासनिक कामों में लगाया गया। आतंकियों के परिवारों को आर्थिक सहायता पहुंचाने और संबंधित सूचियां तैयार करने जैसी जिम्मेदारियां इसी व्यवस्था का हिस्सा बताई जाती हैं।
मौत को लेकर अभी कई सवाल
कारी सईद की मौत के बाद उसकी मृत्यु के वास्तविक कारण को लेकर सवाल उठ रहे हैं। CCTV फुटेज में उसके अचानक गिरने की घटना दिखाई देने की बात कही गई है, लेकिन केवल फुटेज के आधार पर मौत का चिकित्सकीय कारण निर्धारित नहीं किया जा सकता।
अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उसकी मौत किसी प्राकृतिक चिकित्सकीय समस्या के कारण हुई, अचानक स्वास्थ्य बिगड़ने से हुई या इसके पीछे कोई अन्य परिस्थिति थी। अंतिम कारण की पुष्टि के लिए आधिकारिक मेडिकल रिपोर्ट या संबंधित पाकिस्तानी अधिकारियों की जानकारी महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार इतना स्पष्ट है कि LeT से जुड़े बताए जा रहे कारी सईद की इस्लामाबाद की एक मस्जिद में अचानक तबीयत बिगड़ी, वह बेहोश होकर गिर पड़ा, उसे CPR देने की कोशिश की गई और बाद में अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया। उसकी कथित संगठनात्मक भूमिका और भारत में मारे गए आतंकियों के परिवारों को आर्थिक सहायता पहुंचाने से जुड़े दावे इस घटना को सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी महत्वपूर्ण बनाते हैं।


