संसद के मानसून सत्र में लगातार जारी विपक्ष के विरोध और हंगामे के बावजूद केंद्र सरकार सोमवार को चार महत्वपूर्ण विधेयकों को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। कांग्रेस समेत विपक्षी दल जहां कथित राम मंदिर चंदा गबन मामले और दिल्ली में छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से संसद में बयान की मांग कर रहे हैं, वहीं सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह अपने विधायी एजेंडे को किसी भी कीमत पर रोकने के पक्ष में नहीं है।
मानसून सत्र समाप्त होने में अब केवल नौ कार्य दिवस शेष हैं और संसद 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने वाली है। ऐसे में सरकार की प्राथमिकता है कि लंबित महत्वपूर्ण विधेयकों को जल्द से जल्द दोनों सदनों से पारित कराया जाए। सरकार का यह रुख बताता है कि वह विपक्ष के विरोध के बावजूद अपने प्रमुख विधायी कार्यक्रम को समय पर पूरा करना चाहती है।
सरकार की प्राथमिकता में चार महत्वपूर्ण विधेयक
सोमवार के संसदीय कार्यसूची में सबसे प्रमुख विधेयक सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या बढ़ाने से जुड़ा है। इस विधेयक के तहत सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाकर 37 करने का प्रस्ताव रखा गया है। सरकार का मानना है कि इससे लंबित मामलों के तेजी से निपटारे में मदद मिलेगी और न्यायिक व्यवस्था अधिक प्रभावी बन सकेगी।
इसके अलावा सरकार सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र से जुड़े संशोधन विधेयक को भी आगे बढ़ाएगी। इस विधेयक का उद्देश्य छोटे उद्योगों को अधिक सुविधाएं उपलब्ध कराना और उनकी कार्यप्रणाली को सरल बनाना बताया जा रहा है।
सरकार इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट (ISI) के लिए एक व्यापक कानूनी ढांचा तैयार करने वाला नया विधेयक भी पेश करेगी। इससे संस्थान की प्रशासनिक और शैक्षणिक व्यवस्था को अधिक स्पष्ट और आधुनिक स्वरूप मिलने की उम्मीद है।
चौथा महत्वपूर्ण विधेयक बैंकर्स बुक्स में दर्ज साक्ष्यों से संबंधित कानून को आधुनिक डिजिटल बैंकिंग प्रणाली के अनुरूप बनाने से जुड़ा है। डिजिटल लेन-देन के बढ़ते उपयोग को देखते हुए सरकार इस कानून में व्यापक बदलाव करना चाहती है ताकि न्यायिक और वित्तीय प्रक्रियाओं में पारदर्शिता तथा दक्षता बढ़ाई जा सके।
पिछले सप्ताह भी सरकार ने तेजी से पारित कराए विधेयक
पिछले सप्ताह भी सरकार ने विपक्ष के भारी विरोध और लगातार हंगामे के बीच दो महत्वपूर्ण विधेयकों को संसद से पारित कराया था। इनमें वंदे मातरम् को राष्ट्रीय गान के समान कानूनी संरक्षण देने वाला विधेयक शामिल था, जिसे संसद ने 15 मिनट से भी कम समय में मंजूरी दे दी।
इसके अलावा जन्म और मृत्यु पंजीकरण में देरी से संबंधित कानून में संशोधन वाला विधेयक भी पांच मिनट से कम समय में पारित कर दिया गया। विपक्ष ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए सरकार पर बिना चर्चा के विधेयक पारित कराने का आरोप लगाया।
किरेन रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों को किया खारिज
संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि सरकार किसी भी विधेयक को जबरन पारित नहीं करा रही है। उन्होंने कहा कि लगातार हो रहे हंगामे और सदन की कार्यवाही बाधित होने के कारण सार्थक चर्चा का अवसर नहीं मिल पा रहा है।
रिजिजू ने विपक्ष से अपील करते हुए कहा कि यदि वे हर विधेयक पर केवल हंगामा करेंगे तो संसद की कार्यवाही प्रभावित होगी और लोकतांत्रिक प्रक्रिया कमजोर पड़ेगी। उन्होंने विपक्ष से सहयोग करने और सदन को सुचारु रूप से चलाने की अपील की।
विपक्ष फिर उठाएगा राम मंदिर और दिल्ली हिंसा का मुद्दा
सोमवार को संसद की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष एक बार फिर दो प्रमुख मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाने की तैयारी में है। पहला मुद्दा अयोध्या राम मंदिर में मिले चंदे के कथित गबन का है, जबकि दूसरा मुद्दा 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान दिल्ली में छात्रों पर हुई कथित हिंसा से जुड़ा है।
विपक्ष की मांग है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह स्वयं संसद में उपस्थित होकर इस पूरे मामले पर विस्तृत बयान दें। कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार इन गंभीर मुद्दों पर जवाबदेही से बचने का प्रयास कर रही है।
एफसीआरए संशोधन विधेयक पर भी बढ़ा विवाद
संसद के आगामी दिनों में सरकार विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक (FCRA Amendment Bill) भी पेश कर सकती है। विपक्ष का आरोप है कि प्रस्तावित कानून के तहत यदि कोई संस्था समय पर अपना एफसीआरए पंजीकरण नवीनीकृत नहीं करा पाती है, तो सरकार को विदेशी सहायता से बनाई गई उसकी संपत्तियों पर नियंत्रण का व्यापक अधिकार मिल जाएगा।
तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने मांग की है कि इस विधेयक को सीधे पारित करने के बजाय पहले संसदीय समिति के पास भेजा जाए ताकि सभी पहलुओं की विस्तार से जांच हो सके।
राम मंदिर चंदा विवाद ने पकड़ी राजनीतिक गर्मी
इस बीच कांग्रेस ने रविवार को राम मंदिर चंदा गबन मामले को लेकर भाजपा पर अपने हमले और तेज कर दिए। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी ने आरोप लगाया कि भाजपा ने वर्षों तक राम मंदिर के मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठाया और चुनावी फायदे के लिए मंदिर निर्माण का इस्तेमाल किया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मंदिर का उद्घाटन निर्माण कार्य पूरी तरह समाप्त होने से पहले केवल राजनीतिक कारणों से किया गया।
एसआईटी जांच और एफआईआर
गौरतलब है कि जून महीने में राम मंदिर में प्राप्त दान राशि के कथित गबन के आरोप सामने आए थे। इसके बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर गठित विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी थी।
रिपोर्ट के आधार पर अयोध्या पुलिस ने दान की गिनती के दौरान कथित रूप से धन के गबन के आरोप में आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। बाद में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने नई तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया, जिसकी अध्यक्षता आईजी (लखनऊ रेंज) किरण एस को सौंपी गई।
सप्ताह भर जारी रह सकता है राजनीतिक टकराव
सोमवार सुबह विपक्षी दलों के फ्लोर नेताओं की बैठक भी प्रस्तावित है, जिसमें पूरे सप्ताह की रणनीति तय की जाएगी। माना जा रहा है कि विपक्ष अमित शाह के बयान की मांग पर अड़ा रहेगा और सरकार के विधायी एजेंडे का विरोध भी जारी रखेगा।
दूसरी ओर, केंद्र सरकार संसद के शेष दिनों में अधिक से अधिक विधेयकों को पारित कराने की रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में मानसून सत्र के अंतिम दिनों में संसद के भीतर सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव और तेज होने की पूरी संभावना दिखाई दे रही है।


