Thursday, September 3, 2026

Creating liberating content

जन्माष्टमी व्रत 2026: क्या...

भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाने वाली जन्माष्टमी हिंदू धर्म...

भारत का पांचवां विमान...

भारत ने नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद राहत एवं...

सचिन तेंदुलकर के साथ...

भारतीय क्रिकेट के इतिहास में कुछ ऐसे खिलाड़ी भी रहे हैं, जिनके आंकड़े...

असफल गोंद प्रयोग से...

आज चिपकने वाली छोटी पर्चियां हमारे रोजमर्रा के जीवन का बेहद सामान्य हिस्सा...
Homeहिंदीश्रावण मास में...

श्रावण मास में शिव भक्तों पर हेलीकॉप्टर से होगी पुष्पवर्षा, तीर्थयात्रियों के लिए विशेष सुविधाओं का ऐलान

श्रावण मास के दौरान भगवान शिव के भक्तों की सुविधा और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पश्चिम बंगाल में कई विशेष व्यवस्थाओं की घोषणा की गई है। प्रस्तावित योजनाओं के तहत मौसम अनुकूल रहने पर श्रावण के प्रत्येक सोमवार को प्रमुख शिव मंदिरों में जलाभिषेक करने आने वाले श्रद्धालुओं पर हेलीकॉप्टर से गुलाब की पंखुड़ियों की वर्षा की जाएगी। इसके साथ ही तीर्थयात्रियों के लिए सेवा केंद्र, स्वास्थ्य सुविधाएं, पेयजल, विश्राम स्थल और सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत किया जाएगा।

इन घोषणाओं की जानकारी राज्य सचिवालय में आयोजित एक समन्वय बैठक के दौरान दी गई, जिसमें वार्षिक रथ यात्रा और आगामी श्रावण मेले की तैयारियों की समीक्षा की गई। इस वर्ष श्रावण मास 30 जुलाई से 28 अगस्त तक रहेगा और इस अवधि में चार सोमवार पड़ने की संभावना है। इन्हीं चार सोमवारों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शिव मंदिरों में पहुंचने का अनुमान है।

घोषित योजना के अनुसार, शिओराफुली से तारकेश्वर धाम तक हर पांच किलोमीटर की दूरी पर सेवा केंद्र (Seva Kendras) स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा श्रावण मेले के विभिन्न मार्गों पर भी निर्धारित दूरी पर सेवा केंद्र बनाए जाएंगे ताकि कांवड़ लेकर चलने वाले श्रद्धालुओं को आवश्यकता पड़ने पर तुरंत सहायता मिल सके।

इन सेवा केंद्रों पर प्राथमिक चिकित्सा, पेयजल, ओआरएस, विश्राम की व्यवस्था और आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा। पुलिस सहायता शिविर और अस्थायी स्वास्थ्य केंद्र भी स्थापित किए जाएंगे ताकि किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके। प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि श्रद्धालुओं की यात्रा सुरक्षित, व्यवस्थित और सुविधाजनक रहे।

घोषणाओं में यह भी बताया गया कि तारकेश्वर धाम के विकास के लिए लगभग 15 करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। इन विकास कार्यों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार, तीर्थ परिसर का सौंदर्यीकरण और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर व्यवस्थाएं शामिल हैं।

राज्य सरकार ने तीन प्रमुख धार्मिक स्थलों—तारकेश्वर धाम, जलपेश मंदिर (जलपाईगुड़ी) तथा भूटान सीमा के निकट जयंती क्षेत्र के एक मंदिर—को विशेष तीर्थ केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना भी बनाई है। इन स्थानों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए अतिरिक्त सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

बैठक में यह भी कहा गया कि अन्य राज्यों में धार्मिक आयोजनों और तीर्थयात्राओं के दौरान सरकारें सक्रिय रूप से सुविधाएं उपलब्ध कराती हैं। इसी सोच के अनुरूप पश्चिम बंगाल में भी श्रद्धालुओं के लिए व्यापक सहयोग और बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।

यदि मौसम अनुकूल रहा तो श्रावण के प्रत्येक सोमवार को हेलीकॉप्टर से गुलाब की पंखुड़ियों की वर्षा की जाएगी। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं का स्वागत करना और धार्मिक आयोजन को अधिक भव्य स्वरूप देना है। हालांकि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था पूरी तरह मौसम की परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।

धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने “पिलग्रिमेज सर्किट” (Pilgrimage Circuit) विकसित करने की योजना भी बनाई है। इस पहल के तहत ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले स्थलों को आपस में जोड़कर उनकी आधारभूत संरचना विकसित की जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ होगा।

सरकार ने कई प्राचीन मठों और मंदिरों के संरक्षण एवं पुनरुद्धार का भी निर्णय लिया है। इनमें किरीटेश्वरी मंदिर सहित कई ऐतिहासिक धार्मिक स्थल शामिल हैं। इन धरोहर स्थलों को संरक्षित करने और उनके रखरखाव के लिए 1,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किए जाने की जानकारी भी दी गई।

इसके अतिरिक्त भारत सेवाश्रम संघ द्वारा संचालित अस्पतालों को आयुष्मान भारत योजना से जोड़े जाने की बात कही गई, ताकि श्रद्धालुओं और आम नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें। साथ ही स्वामी विवेकानंद के जन्मस्थान सिमला स्ट्रीट के संरक्षण और विकास के लिए 5 करोड़ रुपये के कोष को भी मंजूरी दिए जाने की घोषणा की गई।

रथ यात्रा को लेकर भी विशेष तैयारियां की जा रही हैं। राज्य सरकार पहले ही प्रतिष्ठित रथ यात्रा समितियों को आर्थिक सहायता देने और राज्यभर के पारंपरिक रथ यात्रा मेलों में सेवा केंद्र स्थापित करने की घोषणा कर चुकी है। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य धार्मिक आयोजनों में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

श्रावण मास के दौरान पश्चिम बंगाल के प्रमुख शिव मंदिरों में हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात प्रबंधन, चिकित्सा सेवाओं और बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता देते हुए व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। अधिकारियों का कहना है कि मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाएगी और सभी व्यवस्थाएं श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं सुविधा को ध्यान में रखते हुए संचालित की जाएंगी।

Get notified whenever we post something new!

spot_img

Create a website from scratch

Just drag and drop elements in a page to get started with Newspaper Theme.

Continue reading

जन्माष्टमी व्रत 2026: क्या खाएं, क्या न खाएं और व्रत कब खोलें

भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाने वाली जन्माष्टमी हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। इसे कृष्ण जन्माष्टमी और गोकुलाष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन देशभर में श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण...

भारत का पांचवां विमान बचाव दल और दवाएं लेकर नेपाल रवाना

भारत ने नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद राहत एवं बचाव अभियान को और तेज कर दिया है। इसी क्रम में भारत का पांचवां राहत विमान बुधवार को नेपाल के लिए रवाना हुआ। विदेश मंत्री एस...

सचिन तेंदुलकर के साथ सम्मान पाने वाले बल्लेबाज की अनसुनी कहानी

भारतीय क्रिकेट के इतिहास में कुछ ऐसे खिलाड़ी भी रहे हैं, जिनके आंकड़े उनकी प्रतिभा की गवाही देते हैं, लेकिन जिन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी क्षमता साबित करने के लिए पर्याप्त अवसर नहीं मिल सके। अभिजीत काले की कहानी...

Enjoy exclusive access to all of our content

Get an online subscription and you can unlock any article you come across.