भारत ने नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद राहत एवं बचाव अभियान को और तेज कर दिया है। इसी क्रम में भारत का पांचवां राहत विमान बुधवार को नेपाल के लिए रवाना हुआ। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सामाजिक माध्यम पर जानकारी देते हुए बताया कि इस विमान में 11 सदस्यीय विशेष बचाव दल, अत्याधुनिक बचाव उपकरण और 5.5 टन आवश्यक दवाएं भेजी गई हैं। यह सहायता ऐसे समय में पहुंचाई जा रही है, जब नेपाल में प्राकृतिक आपदा से मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
नेपाल पुलिस के अनुसार बुधवार तक बाढ़ और उससे जुड़ी घटनाओं में मृतकों की कुल संख्या 1,127 तक पहुंच गई है। आपदा की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि नेपाल के कई जिलों में बड़ी संख्या में शव बरामद किए गए हैं। रसुवा से 45, नुवाकोट से 155, धादिंग से 59, चितवन से 348, गोरखा से 66, तनहूं से 38, नवलपरासी पूर्व से 217 और नवलपरासी पश्चिम से 190 शव बरामद किए गए हैं। इसके अलावा भारत में भी नौ शव बरामद किए जाने की सूचना नेपाल पुलिस ने दी है।
अब तक बरामद शवों में से केवल 95 की पहचान हो सकी है और उन्हें उनके परिवारों को सौंपा गया है। बड़ी संख्या में शवों की पहचान अभी बाकी है। इस चुनौतीपूर्ण स्थिति में नेपाल सरकार पहचान की प्रक्रिया को वैज्ञानिक तरीके से आगे बढ़ा रही है। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने एक दिन पहले बताया था कि बाढ़ में जान गंवाने वाले और अज्ञात अवस्था में मिले लोगों के शवों का प्रबंधन कानूनी तथा वैज्ञानिक प्रक्रियाओं के अनुसार किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री के अनुसार, सरकार केवल उन शवों का अंतिम प्रबंधन कर रही है जिनकी पहचान फिलहाल संभव नहीं हो सकी है। ऐसे मामलों में उनके आनुवंशिक नमूनों और पहचान में सहायता करने वाले अन्य प्रमाणों को सुरक्षित रखा जा रहा है। नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल की सहायता से यह पूरी प्रक्रिया संचालित की जा रही है। जिन शवों की पहचान हो चुकी है, उन्हें संबंधित परिवारों को सौंपा जा रहा है।
भारत द्वारा भेजा गया पांचवां विमान दोनों देशों के बीच जारी मानवीय सहयोग का महत्वपूर्ण हिस्सा है। नेपाल भारत की पड़ोसी प्राथमिकता नीति में विशेष स्थान रखता है और आपदा के समय भारत लगातार राहत एवं बचाव सहायता उपलब्ध कराता रहा है। इस बार भी भारत ने मानवीय सहायता और आपदा राहत व्यवस्था के तहत बचाव कर्मियों, उपकरणों और दवाओं को नेपाल भेजा है।
नेपाल के गंभीर रूप से प्रभावित क्षेत्रों में बचाव अभियान केवल सतही इलाकों तक सीमित नहीं है। भोटे कोशी नदी में आई विनाशकारी अचानक बाढ़ के बाद कई जलविद्युत परियोजनाओं के सुरंग क्षेत्रों में भी गंभीर स्थिति पैदा हुई है। नेपाल के विदेश मंत्रालय के अनुसार, महत्वपूर्ण जलविद्युत स्थलों पर नेपाल की सेना के साथ भारत और चीन के विशेष अंतरराष्ट्रीय सुरंग बचाव दलों को तैनात किया गया है।
भारत की ओर से सुरंग बचाव अभियान में विशेषज्ञों की एक टीम महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, चिलिमे क्षेत्र की जलविद्युत सुरंगों में तैनात 24 सदस्यीय भारतीय सुरंग बचाव दल को बेहद कठिन परिस्थितियों में अभियान चलाना पड़ रहा है। सुरंगों के भीतर पहुंचने के रास्ते अत्यंत संकरे हैं। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण भारी और विशेष उपकरणों का इस्तेमाल भी सीमित है।
इसके अलावा सुरंगों के फर्श पर दलदली स्थिति ने बचाव कार्य को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। इन परिस्थितियों के बावजूद भारतीय बचाव कर्मियों ने नए तरीकों और स्थानीय स्तर पर तैयार किए गए तैरने वाले साधनों की सहायता से सुरंगों के भीतर आगे बढ़ने का प्रयास किया। बचाव दल का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं सुरंगों के भीतर कोई व्यक्ति फंसा तो नहीं है। विदेश मंत्रालय ने बताया कि यह अभियान बुधवार को भी जारी रहेगा।
नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने का अभियान भी लगातार जारी है। भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, आपदा प्रभावित क्षेत्रों से बचाए गए भारतीय नागरिकों की संख्या 163 हो गई है। सोमवार के बाद पांच और भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया है। भारत सरकार प्रभावित क्षेत्रों में मौजूद अपने नागरिकों की स्थिति पर लगातार नजर रख रही है और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय कर उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का प्रयास कर रही है।
इसके साथ ही चीन से भी भारतीय नागरिकों की वापसी की प्रक्रिया जारी रही। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि मंगलवार को 151 भारतीय नागरिक चीन से बाहर निकले। नेपाल और आसपास के क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदा के कारण परिवहन और संचार व्यवस्था प्रभावित होने के बावजूद भारतीय अधिकारियों द्वारा नागरिकों की सहायता और सुरक्षित निकासी के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
बचाव अभियान के साथ मृतकों की पहचान भी एक बड़ी प्राथमिकता बन गई है। भारत की विशेष न्यायवैज्ञानिक टीम ने नेपाली अधिकारियों के साथ मिलकर अपना काम बढ़ा दिया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारतीय विशेषज्ञ डीएनए जांच और विश्लेषण की प्रक्रिया में सहयोग कर रहे हैं। इसका उद्देश्य मृतकों के नमूनों की जांच को तेज करना और उनकी पहचान जल्द से जल्द सुनिश्चित करना है, ताकि अधिक से अधिक शव उनके परिवारों को सौंपे जा सकें।
नेपाल में आई इस आपदा ने बड़े पैमाने पर जनजीवन को प्रभावित किया है। बाढ़ और अचानक आई तेज जलधाराओं के कारण कई इलाकों में लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। जलविद्युत परियोजनाओं, सुरंगों, सड़कों और अन्य महत्वपूर्ण ढांचों पर भी इसका असर पड़ा है। ऐसे में राहत सामग्री, चिकित्सा सहायता और विशेष बचाव दलों की उपलब्धता प्रभावित क्षेत्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
भारत का पांचवां राहत विमान इसी व्यापक सहायता अभियान का अगला चरण है। इसमें भेजी गई 5.5 टन आवश्यक दवाएं प्रभावित लोगों के लिए चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। वहीं विशेष बचाव उपकरणों से लैस 11 सदस्यीय दल कठिन परिस्थितियों में राहत एवं बचाव कार्यों को मजबूत करेगा।
भारत और नेपाल के बीच भौगोलिक निकटता तथा मजबूत मानवीय संबंधों के कारण प्राकृतिक आपदा के समय दोनों देशों के बीच सहयोग का विशेष महत्व है। वर्तमान संकट में भारत की ओर से लगातार राहत विमान भेजना, नागरिकों को सुरक्षित निकालना, सुरंग बचाव अभियान में विशेषज्ञ सहायता देना और न्यायवैज्ञानिक पहचान प्रक्रिया में सहयोग करना इसी सहयोग को दर्शाता है।
नेपाल में राहत और बचाव अभियान अभी जारी है। बड़ी संख्या में शवों की पहचान बाकी होने तथा कई दुर्गम क्षेत्रों में अभियान चलाए जाने के कारण आने वाले दिनों में भी विशेष दलों की भूमिका महत्वपूर्ण रहने वाली है। भारत और नेपाल के अधिकारी प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर नजर रखते हुए बचाव, चिकित्सा सहायता, नागरिकों की सुरक्षित निकासी और मृतकों की पहचान से जुड़े प्रयासों को आगे बढ़ा रहे हैं।


