बच्चे की योजना बनाते समय आमतौर पर मां के स्वास्थ्य, गर्भावस्था के दौरान पोषण और आवश्यक विटामिनों पर अधिक ध्यान दिया जाता है। लेकिन एक नए अध्ययन ने इस सोच को थोड़ा व्यापक करने का संकेत दिया है। अध्ययन के अनुसार, गर्भधारण के आसपास केवल मां ही नहीं, बल्कि पिता के शरीर में विटामिन बी बारह का स्तर भी बच्चे में जन्मजात दोषों के जोखिम से जुड़ा हो सकता है।
चीन के फूतान विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने इस विषय पर व्यापक अध्ययन किया। शोध में गर्भधारण से पहले तीन हजार से अधिक दंपतियों के रक्त के नमूनों का विश्लेषण किया गया। इसके अलावा लगभग अठारह हजार महिलाओं की गर्भावस्था के शुरुआती चरण में जांच से प्राप्त आंकड़ों का भी अध्ययन किया गया।
शोधकर्ताओं ने पाया कि माता और पिता दोनों में विटामिन बी बारह का स्तर अधिक होने पर बच्चों में जन्मजात दोषों की संभावना अपेक्षाकृत कम दिखाई दी। इनमें हृदय से संबंधित जन्मजात विकृतियां भी शामिल थीं, जो अध्ययन में पाए गए मामलों का बड़ा हिस्सा थीं।
विटामिन बी बारह क्यों महत्वपूर्ण है?
विटामिन बी बारह शरीर के लिए आवश्यक पोषक तत्वों में से एक है। यह शरीर में आनुवंशिक पदार्थ के निर्माण, तंत्रिका तंत्र के स्वस्थ संचालन और लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
गर्भधारण और भ्रूण के शुरुआती विकास के दौरान शरीर में होने वाली अनेक जैविक प्रक्रियाओं के लिए पर्याप्त पोषण आवश्यक होता है। खास बात यह है कि कई जन्मजात दोष गर्भावस्था के शुरुआती कुछ सप्ताहों में विकसित हो सकते हैं। कई महिलाओं को उस समय तक गर्भधारण की जानकारी भी नहीं होती।
इसी कारण विशेषज्ञ गर्भधारण से पहले के स्वास्थ्य और पोषण को महत्वपूर्ण मानते हैं। इसका अर्थ यह है कि स्वस्थ गर्भावस्था की तैयारी गर्भधारण की पुष्टि होने के बाद नहीं, बल्कि उससे पहले शुरू करना अधिक उपयोगी हो सकता है।
अध्ययन में तीन हजार से अधिक दंपतियों को शामिल किया गया
फूतान विश्वविद्यालय के बाल चिकित्सा अस्पताल से जुड़े शोधकर्ताओं ने कुल ३,०३२ दंपतियों के आंकड़ों का अध्ययन किया। इन दंपतियों के रक्त में विटामिन बी बारह और लाल रक्त कोशिकाओं में फोलेट के स्तर को गर्भधारण से चार महीने पहले तक की अवधि में मापा गया।
इसके अलावा १७,७६५ महिलाओं के आंकड़ों का भी विश्लेषण किया गया, जिनकी जांच गर्भावस्था के चार महीने या उससे पहले की अवधि में की गई थी।
अध्ययन के परिणामों में यह सामने आया कि मां के शरीर में विटामिन बी बारह का स्तर बढ़ने के साथ जन्मजात दोषों की उपस्थिति कम होती गई। पिता के मामले में भी ऐसा संबंध देखा गया, हालांकि विटामिन बी बारह का स्तर मध्यम से अधिक होने के बाद यह संबंध अपेक्षाकृत कमजोर दिखाई दिया।
शोधकर्ताओं के अनुसार, ये परिणाम गर्भधारण से पहले दोनों माता-पिता के पोषण पर ध्यान देने की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।
केवल मां नहीं, पिता का स्वास्थ्य भी महत्वपूर्ण
अब तक गर्भधारण की तैयारी से जुड़ी स्वास्थ्य संबंधी सलाह का बड़ा हिस्सा महिलाओं के पोषण पर केंद्रित रहा है। खास तौर पर फोलेट और फोलिक अम्ल के पर्याप्त सेवन को गर्भावस्था के शुरुआती चरण में महत्वपूर्ण माना जाता है।
नए अध्ययन के परिणाम यह संकेत देते हैं कि बच्चे के स्वास्थ्य को लेकर पिता के पोषण की भूमिका को भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
पिता केवल आनुवंशिक सामग्री ही प्रदान नहीं करते, बल्कि उनके पोषण और शरीर की जैविक स्थिति से जुड़े कुछ ऐसे परिवर्तन भी हो सकते हैं जो बच्चे के विकास पर प्रभाव डाल सकते हैं। शोधकर्ताओं ने विशेष रूप से आनुवंशिक गतिविधियों को प्रभावित करने वाली जैविक प्रक्रियाओं और विटामिन बी बारह तथा फोलेट से संबंधित चयापचय की भूमिका पर ध्यान दिया।
हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि केवल विटामिन बी बारह का स्तर बढ़ाने से जन्मजात दोषों को निश्चित रूप से रोका जा सकता है। अध्ययन में संबंध देखा गया है, लेकिन किसी कारण और परिणाम को अंतिम रूप से स्थापित करने के लिए आगे के शोध की आवश्यकता होगी।
लाल रक्त कोशिकाओं में फोलेट का स्तर भी महत्वपूर्ण
अध्ययन में फोलेट को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई। गर्भधारण के बाद मां की लाल रक्त कोशिकाओं में फोलेट का अधिक स्तर जन्मजात दोषों की कम अनुमानित उपस्थिति से जुड़ा पाया गया।
यह निष्कर्ष गर्भधारण के आसपास पर्याप्त पोषण बनाए रखने के महत्व को और मजबूत करता है। फोलेट भ्रूण के शुरुआती विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और लंबे समय से गर्भावस्था की तैयारी से जुड़ी चिकित्सकीय सलाह का अहम हिस्सा रहा है।
इस अध्ययन से यह संदेश मिलता है कि केवल गर्भावस्था की पुष्टि होने के बाद पोषण पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं हो सकता। गर्भधारण की योजना बना रहे दंपतियों को पहले से ही अपने भोजन, पोषण और स्वास्थ्य की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए।
किन खाद्य पदार्थों से मिलता है विटामिन बी बारह?
विटामिन बी बारह मुख्य रूप से मांस, मछली, मुर्गी, अंडे और दुग्ध उत्पादों जैसे खाद्य पदार्थों से प्राप्त होता है। जिन लोगों के भोजन में पशु स्रोतों से मिलने वाले खाद्य पदार्थ बहुत कम या बिल्कुल नहीं होते, उनमें विटामिन बी बारह की कमी होने की संभावना अपेक्षाकृत अधिक हो सकती है।
विशेष रूप से शाकाहारी और पूर्णतः वनस्पति आधारित आहार लेने वाले लोगों को अपने विटामिन बी बारह की स्थिति पर चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ध्यान देना चाहिए।
हालांकि हर व्यक्ति के लिए बिना जांच या चिकित्सकीय सलाह के विटामिन की गोलियां या अन्य पूरक लेना आवश्यक नहीं है। शरीर में किसी पोषक तत्व की कमी है या नहीं, इसका आकलन व्यक्ति के आहार, स्वास्थ्य स्थिति और चिकित्सकीय जांच के आधार पर किया जाना चाहिए।
क्या गर्भधारण की योजना बना रहे दंपतियों को पूरक लेना चाहिए?
अध्ययन के आधार पर यह कहना उचित नहीं होगा कि हर दंपति को तुरंत विटामिन बी बारह के पूरक लेना शुरू कर देना चाहिए। विशेषज्ञों का सुझाव है कि गर्भधारण से पहले स्वास्थ्य को लेकर चिकित्सक से बातचीत करना अधिक उचित कदम है।
जरूरत पड़ने पर चिकित्सक विटामिन बी बारह और फोलेट की स्थिति की जांच की सलाह दे सकते हैं। खासकर ऐसे लोगों के लिए यह अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है जिनका आहार सीमित है या जिनमें पोषक तत्वों की कमी की आशंका है।
गर्भधारण की योजना बनाने वाले दंपतियों के लिए संतुलित आहार, पर्याप्त पोषण, नियमित स्वास्थ्य जांच और चिकित्सकीय सलाह महत्वपूर्ण आधार हो सकते हैं।
गर्भावस्था से पहले की तैयारी पर बढ़ता जोर
विशेषज्ञों के अनुसार, गर्भधारण से पहले का समय बच्चे के भविष्य के स्वास्थ्य की तैयारी का महत्वपूर्ण चरण हो सकता है। शरीर में पोषक तत्वों की पर्याप्त उपलब्धता गर्भधारण और भ्रूण के शुरुआती विकास के दौरान होने वाली जैविक प्रक्रियाओं को समर्थन दे सकती है।
नए अध्ययन ने इस चर्चा को एक कदम आगे बढ़ाते हुए यह संकेत दिया है कि बच्चे के स्वास्थ्य से जुड़े कुछ पहलुओं में माता और पिता दोनों का पोषण महत्वपूर्ण हो सकता है।
हालांकि इस अध्ययन के निष्कर्षों को लेकर लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। विटामिन बी बारह का स्तर, फोलेट और अन्य पोषक तत्वों की जरूरत हर व्यक्ति में अलग हो सकती है। इसलिए स्वयं से किसी पूरक की मात्रा तय करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।
कुल मिलाकर, यह अध्ययन गर्भधारण की योजना बनाने वाले दंपतियों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश देता है। स्वस्थ बच्चे की तैयारी केवल गर्भावस्था शुरू होने के बाद नहीं होती, बल्कि उससे पहले ही माता और पिता दोनों के स्वास्थ्य और पोषण पर ध्यान देना उपयोगी हो सकता है।


