भारत सरकार ने वर्ष 2026 से 2031 की अवधि के लिए नई खेलो इंडिया योजना के तहत 36,441 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। यह राशि पिछली योजना की तुलना में लगभग आठ गुना अधिक है और स्वतंत्रता के बाद देश में खेलों के विकास के लिए किया गया सबसे बड़ा निवेश बताया जा रहा है। इस बड़े वित्तीय प्रावधान का उद्देश्य देश के खेल ढांचे को मजबूत करना, जमीनी स्तर से प्रतिभाओं को तलाशना और खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में भारतीय खेल प्राधिकरण के केंद्रीय क्षेत्रीय केंद्र के निदेशक अभिषेक सिंह चौहान ने नई योजना के बारे में विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम का आयोजन भारतीय खेल प्राधिकरण के केंद्रीय क्षेत्रीय केंद्र, भोपाल और मध्य प्रदेश शासन के खेल एवं युवा कल्याण विभाग के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इस अवसर पर मध्य प्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
अभिषेक सिंह चौहान ने बताया कि नई योजना के अंतर्गत खेलों में निवेश को बड़े स्तर पर बढ़ाया गया है। सरकार का अनुमान है कि इस योजना से पिछली व्यवस्था की तुलना में लगभग दस गुना अधिक खिलाड़ियों को लाभ मिल सकता है। इससे देश में खेल प्रतिभाओं की पहचान और उनके विकास के लिए पहले से कहीं व्यापक व्यवस्था तैयार होने की उम्मीद है।
खेलों को राष्ट्रीय मिशन के रूप में बढ़ावा
नई खेलो इंडिया योजना का उद्देश्य केवल खेल प्रतियोगिताओं को प्रोत्साहित करना नहीं है। इसके माध्यम से युवाओं को खेल के क्षेत्र में अवसर, आत्मविश्वास और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की व्यापक व्यवस्था तैयार करने की योजना है। सरकार का लक्ष्य जमीनी स्तर पर प्रतिभा की पहचान से लेकर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक खिलाड़ियों के लिए एक मजबूत और व्यवस्थित मार्ग तैयार करना है।
योजना को विकसित भारत 2047 की व्यापक परिकल्पना से भी जोड़ा गया है। इसका उद्देश्य भारत को दुनिया के प्रमुख खेल राष्ट्रों में शामिल करने के लिए आवश्यक आधार तैयार करना है। इसके तहत खिलाड़ियों की प्रतिभा को शुरुआती स्तर पर पहचानने, उन्हें वैज्ञानिक प्रशिक्षण देने और उच्च स्तरीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
मध्य प्रदेश में 52 खेलो इंडिया केंद्र
मध्य प्रदेश में वर्तमान समय में 52 खेलो इंडिया केंद्र संचालित हैं। खेल मंत्री विश्वास कैलाश सारंग के अनुसार नई व्यवस्था के तहत इन केंद्रों को और मजबूत किया जाएगा। साथ ही भोपाल को प्रमुख खेल केंद्र के रूप में विकसित करने के प्रयास किए जाएंगे।
राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में मौजूद खेल प्रतिभाओं की पहचान की जाएगी। इसके बाद संबंधित क्षेत्र की खेल क्षमता और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार विकास की रणनीति तैयार की जाएगी। इसका मतलब यह है कि राज्य के हर क्षेत्र में एक जैसी खेल व्यवस्था लागू करने के बजाय वहां की विशेष प्रतिभा और खेल परंपरा के आधार पर सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
मध्य प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग खेलों के प्रति विशेष रुचि और प्रतिभा मौजूद है। नई योजना के तहत ऐसे प्रतिभा समूहों की पहचान की जाएगी। इसके लिए खिलाड़ियों की संख्या, संबंधित खेल में उनकी क्षमता, उपलब्ध खेल सुविधाओं, प्रशिक्षकों की जरूरत और प्रतियोगिताओं के अवसरों का अध्ययन किया जाएगा।
पदक आधारित खेल ढांचे पर जोर
नई खेलो इंडिया योजना में खेल सुविधाओं के विकास को तीन प्रमुख क्षेत्रों में बांटा गया है। पहला क्षेत्र पदक आधारित खेल रणनीति के लिए आवश्यक खेल सुविधाओं का विकास है। इसका उद्देश्य ओलंपिक और अन्य बड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत के प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए जरूरी आधारभूत ढांचा तैयार करना है।
दूसरे क्षेत्र में महत्वपूर्ण मौजूदा खेल परिसरों और सुविधाओं को मजबूत तथा आधुनिक बनाने पर जोर दिया जाएगा। कई स्थानों पर पहले से मौजूद सुविधाओं को बेहतर प्रशिक्षण और उच्च स्तरीय प्रतियोगिताओं के अनुकूल बनाया जा सकता है।
तीसरे क्षेत्र में राज्यों के लिए खेल आधारभूत ढांचे के विकास की कार्ययोजना शामिल है। इसके अंतर्गत राज्यों को अपनी स्थानीय जरूरतों और खेल प्राथमिकताओं के अनुसार सुविधाओं की योजना बनाने में अधिक भूमिका मिलेगी। जहां लागू होगा, वहां परियोजनाओं को केंद्र और राज्य सरकारों के बीच 60:40 के खर्च साझेदारी मॉडल के आधार पर आगे बढ़ाया जाएगा।
जमीनी प्रतिभाओं को मिलेगा उच्च स्तरीय प्रशिक्षण
नई योजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में वैज्ञानिक और तकनीक आधारित प्रतिभा पहचान व्यवस्था शामिल है। खेलो इंडिया केंद्रों, खेलो इंडिया से जुड़े विद्यालयों और अन्य चिन्हित संस्थानों के माध्यम से कम उम्र में ही खेल प्रतिभाओं की पहचान करने का प्रयास किया जाएगा।
इस व्यवस्था से मध्य प्रदेश जैसे राज्यों को विशेष लाभ मिल सकता है। विद्यालयों और जिलों में मौजूद प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को मुख्य खेल व्यवस्था से जोड़कर उन्हें बेहतर प्रशिक्षण और प्रतियोगिता के अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं।
पहले चरण में पहचाने गए खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण व्यवस्था से जोड़ने पर जोर रहेगा। इससे जमीनी स्तर और उत्कृष्ट खेल प्रशिक्षण के बीच मौजूद दूरी कम करने में मदद मिलेगी।
उभरते खिलाड़ियों के लिए विशेष सहायता
योजना के तहत खिलाड़ियों को खेलो इंडिया खिलाड़ी और उभरते खेलो इंडिया खिलाड़ी श्रेणियों के माध्यम से सहायता देने की व्यवस्था की गई है। उभरते खिलाड़ियों की श्रेणी का उद्देश्य ऐसे खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का अवसर देना है, जिनमें उच्च स्तर पर प्रदर्शन करने की पर्याप्त क्षमता दिखाई देती है, लेकिन वे अभी उत्कृष्ट स्तर तक नहीं पहुंचे हैं।
खिलाड़ियों को केवल प्रशिक्षण तक सीमित सहायता नहीं दी जाएगी। उनके लिए प्रशिक्षक, विशेष प्रशिक्षण, भोजन, आवास, खेल पोशाक, उपकरण, यात्रा, प्रतियोगिताओं में भागीदारी, चिकित्सा देखभाल और शिक्षा जैसी आवश्यकताओं को भी सहायता व्यवस्था में शामिल किया जाएगा।
खेल विज्ञान से जुड़े विशेषज्ञों की भूमिका भी बढ़ाई जाएगी। खिलाड़ियों के प्रशिक्षण और प्रदर्शन को वैज्ञानिक आधार देने के लिए चिकित्सक, शरीर-चिकित्सक, मनोवैज्ञानिक, पोषण विशेषज्ञ और शरीर गति विशेषज्ञ जैसी सेवाओं को खेल व्यवस्था से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा।
अधिक प्रतियोगिताओं से खिलाड़ियों को मिलेगा अनुभव
नई योजना के तहत खिलाड़ियों के लिए नियमित और अधिक संख्या में प्रतियोगिताओं के अवसर बढ़ाने की योजना है। विद्यालय, विश्वविद्यालय, क्षेत्रीय, मंडलीय और खेल विशेष प्रतियोगिताओं के माध्यम से खिलाड़ियों को अपनी क्षमता परखने का अवसर मिलेगा।
खेलो इंडिया युवा खेल और खेलो इंडिया विश्वविद्यालय खेलों के अलावा पैरा खेल, शीतकालीन खेल, समुद्र तटीय खेल, जनजातीय खेल, जल खेल और महिलाओं की खेल प्रतियोगिताओं जैसी गतिविधियों को भी व्यापक खेल व्यवस्था का हिस्सा बनाया जाएगा।
नियमित प्रतियोगिताओं से खिलाड़ियों को मजबूत प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ खेलने का अनुभव मिलेगा। इससे उन्हें अपनी कमजोरियों को समझने और उच्च स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए मानसिक तथा शारीरिक रूप से तैयार होने में सहायता मिलेगी।
प्रशिक्षकों और सहायक कर्मचारियों को भी मिलेगा प्रशिक्षण
नई योजना में केवल खिलाड़ियों पर ही ध्यान नहीं दिया गया है। प्रशिक्षकों और खेल से जुड़े सहायक कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण और कौशल विकास कार्यक्रम चलाए जाएंगे।
प्रशिक्षकों को उन्नत प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनुभव प्राप्त करने के अवसर देने की योजना है। प्रस्तावित राष्ट्रीय प्रशिक्षक मान्यता बोर्ड के माध्यम से प्रशिक्षकों के पेशेवर मानकों को मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा।
इससे देश में प्रशिक्षकों की गुणवत्ता में सुधार आने और खिलाड़ियों को अधिक वैज्ञानिक एवं आधुनिक प्रशिक्षण मिलने की उम्मीद है।
फिटनेस अभियान को भी मिलेगी नई गति
नई खेलो इंडिया योजना में आम नागरिकों के बीच शारीरिक सक्रियता और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया है। इसके तहत सामुदायिक स्वास्थ्य एवं व्यायाम केंद्र, बड़े स्तर पर जनभागीदारी वाले कार्यक्रम, योग और पारंपरिक भारतीय खेलों को बढ़ावा देने की योजना है।
महिलाओं और दिव्यांग व्यक्तियों की खेलों में भागीदारी बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। विद्यालयों, महाविद्यालयों और सामुदायिक संगठनों के साथ साझेदारी करके खेलों को समाज के अधिक बड़े वर्ग तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
खेलों में तकनीक का बढ़ता इस्तेमाल
नई योजना में आधुनिक तकनीक को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। खिलाड़ियों की प्रतिभा पहचानने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता और वीडियो आधारित विश्लेषण का इस्तेमाल किया जा सकता है। पहनने योग्य उपकरणों के माध्यम से खिलाड़ियों के प्रदर्शन और शारीरिक गतिविधियों से जुड़े आंकड़ों को समझने की व्यवस्था विकसित की जाएगी।
प्रदर्शन का कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित विश्लेषण और प्रतियोगिताओं के डिजिटल प्रबंधन जैसी व्यवस्थाएं भी खेल प्रणाली को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद कर सकती हैं। इसका उद्देश्य खिलाड़ी की यात्रा को शुरुआती प्रतिभा पहचान से लेकर उच्च स्तर के प्रदर्शन तक आंकड़ों और वैज्ञानिक विश्लेषण से जोड़ना है।
भोपाल और मध्य प्रदेश के लिए बड़ा अवसर
नई योजना मध्य प्रदेश के खेल ढांचे को मजबूत करने का बड़ा अवसर प्रदान कर सकती है। राज्य में पहले से मौजूद 52 खेलो इंडिया केंद्र, खेल प्रतिभाओं की विविधता और भोपाल में उपलब्ध खेल सुविधाएं इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए महत्वपूर्ण आधार बन सकती हैं।
यदि जिला और जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं की सही पहचान होती है और उन्हें बेहतर प्रशिक्षण, खेल विज्ञान, प्रतियोगिताओं तथा आवश्यक सुविधाओं से जोड़ा जाता है, तो मध्य प्रदेश से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के अधिक खिलाड़ी सामने आ सकते हैं।
कुल मिलाकर 36,441 करोड़ रुपये का प्रावधान भारतीय खेलों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नई योजना का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि धनराशि, सुविधाओं और प्रशिक्षण का लाभ जमीनी स्तर के खिलाड़ियों तक कितनी प्रभावी ढंग से पहुंचता है। यदि प्रतिभा पहचान, आधारभूत ढांचे और उच्च स्तरीय प्रशिक्षण के बीच मजबूत संबंध स्थापित होता है, तो यह योजना भारत के खेल भविष्य को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।


