भारतीय क्रिकेट टीम के विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत ने सोमवार को कोलंबो में श्रीलंका के खिलाफ दूसरे टेस्ट मुकाबले के दौरान एक बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली। पंत ने विदेशी या तटस्थ मैदानों पर विकेटकीपर के रूप में भारत के लिए सबसे अधिक टेस्ट रन बनाने के मामले में पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को पीछे छोड़ दिया।
पंत ने 2,496 रन के धोनी के आंकड़े को पार करते हुए अपना कुल स्कोर 2,501 रन तक पहुंचाया। इस उपलब्धि के साथ वह विदेशी परिस्थितियों में भारत के सबसे सफल विकेटकीपर बल्लेबाज बन गए हैं। पंत ने यह उपलब्धि 41.68 की औसत से हासिल की है, जबकि धोनी ने विदेशी या तटस्थ टेस्ट मुकाबलों में 32.84 की औसत से 2,496 रन बनाए थे।
यह रिकॉर्ड पंत के लिए इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने अभी तक अपने टेस्ट करियर में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। चोटों, वापसी और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने विदेशी मैदानों पर लगातार प्रभावशाली बल्लेबाजी की है।
विदेशी टेस्ट में पंत का बढ़ता प्रभाव
ऋषभ पंत की बल्लेबाजी की सबसे बड़ी खासियत उनका आक्रामक अंदाज है। वह केवल रन बनाने के लिए बल्लेबाजी नहीं करते, बल्कि कई बार अपनी पारी से पूरे मुकाबले की दिशा बदलने की क्षमता रखते हैं।
विदेशी परिस्थितियों में तेज गेंदबाजों और उछाल वाली पिचों का सामना करना आसान नहीं होता। इसके बावजूद पंत ने कई मौकों पर आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए भारत को मुश्किल परिस्थितियों से बाहर निकाला है।
उनकी बल्लेबाजी में जोखिम भी दिखाई देता है। कभी-कभी आक्रामक रवैये के कारण वह जल्दी अपना विकेट गंवा देते हैं, लेकिन जब उनका बल्ला चलता है तो वह बड़ी और मैच का रुख बदलने वाली पारियां खेलने में सक्षम होते हैं।
इसी निरंतर प्रभाव ने उन्हें भारतीय टेस्ट टीम के सबसे महत्वपूर्ण खिलाड़ियों में शामिल किया है।
पांचवें नंबर पर पंत का शानदार प्रदर्शन
टेस्ट क्रिकेट में पांचवें नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए पंत का रिकॉर्ड उनकी निरंतरता को और स्पष्ट करता है। इस क्रम पर उन्होंने कई बड़ी पारियां खेली हैं और कई बार भारतीय पारी को मजबूत स्थिति तक पहुंचाया है।
पांचवें नंबर पर उनकी प्रमुख पारियों में 97, नाबाद 89, 96, 146, 93, 109, 99, 64, 134, 118, 65, 74, 54, 81, 66 और 63 रन जैसी पारियां शामिल हैं।
इनमें 111 गेंदों पर बनाए गए 146 रन और 178 गेंदों पर बनाए गए 134 रन विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। इसके अलावा 109 और 118 रन की पारियों ने भी यह दिखाया है कि पंत केवल आक्रामक बल्लेबाज ही नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर लंबी पारी खेलने की क्षमता रखने वाले बल्लेबाज भी हैं।
उनके नाम इस क्रम पर कई अर्धशतक भी हैं। यही कारण है कि पांचवें नंबर पर उनका योगदान भारतीय मध्यक्रम के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
आक्रामक शैली में जोखिम भी शामिल
पंत की बल्लेबाजी का एक दूसरा पहलू भी है। उनकी आक्रामक शैली के कारण बड़ी पारियों के साथ कुछ कम स्कोर भी उनके रिकॉर्ड में दिखाई देते हैं। उनके खाते में शून्य, एक और दो रन जैसी छोटी पारियां भी रही हैं।
हालांकि, उनकी बड़ी पारियों की संख्या और मैच पर उनके प्रभाव ने इन कम स्कोर को काफी हद तक पीछे छोड़ दिया है।
उनकी बल्लेबाजी का मूल स्वभाव परिस्थितियों को बदलने की कोशिश करना है। जब विपक्षी गेंदबाज दबाव बना रहे होते हैं, तब पंत कई बार आक्रामक शॉट खेलकर गेंदबाजों की योजना बिगाड़ देते हैं।
यही विशेषता उन्हें अन्य विकेटकीपर बल्लेबाजों से अलग बनाती है।
धोनी के बाद पंत, तीसरे स्थान पर फारुख इंजीनियर
विदेशी या तटस्थ मैदानों पर विकेटकीपर के रूप में सबसे ज्यादा टेस्ट रन बनाने वाले भारतीय खिलाड़ियों की सूची में अब पंत शीर्ष पर पहुंच गए हैं।
पंत के 2,501 रन के बाद महेंद्र सिंह धोनी 2,496 रन के साथ दूसरे स्थान पर हैं। फारुख इंजीनियर 1,209 रन के साथ तीसरे स्थान पर हैं।
सैयद किरमानी ने विदेशी या तटस्थ टेस्ट मुकाबलों में 1,109 रन बनाए हैं, जबकि किरण मोरे के नाम 901 रन हैं।
इस सूची में पंत की खासियत केवल उनके कुल रन नहीं हैं। उनकी बल्लेबाजी औसत भी धोनी की तुलना में बेहतर है। पंत ने 41.68 की औसत से यह आंकड़ा हासिल किया है, जबकि धोनी की औसत 32.84 रही थी।
इससे विदेशी परिस्थितियों में पंत के बल्लेबाजी प्रभाव का अंदाजा लगाया जा सकता है।
चोट के बीच हासिल किया बड़ा मुकाम
कोलंबो में हासिल किया गया यह रिकॉर्ड पंत के लिए बिल्कुल आसान परिस्थितियों में नहीं आया। मुकाबले के पहले दिन श्रीलंका के तेज गेंदबाज लाहिरू कुमारा की एक छोटी गेंद पंत के बाएं हाथ पर जोर से लगी थी।
पंत उस गेंद को पीछे की ओर खेलने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन गेंद उनके हाथ से जा टकराई। चोट लगने के बाद वह काफी असहज दिखाई दिए।
भारतीय टीम के चिकित्सकीय दल ने मैदान पर उनकी जांच की। शुरुआती उपचार के तौर पर उनके हाथ पर बर्फ लगाई गई और बाद में उसे पट्टी से बांधा गया।
उस समय पंत 15 गेंदों पर केवल तीन रन बना सके थे। भारतीय पारी के 58वें चरण के दौरान वह टीम के चिकित्सकीय सदस्य के साथ मैदान से बाहर चले गए।
इस घटनाक्रम ने उनकी बल्लेबाजी को लेकर चिंता बढ़ा दी थी।
दूसरे दिन फिर मैदान पर लौटे पंत
हालांकि पंत ने हार नहीं मानी और अगले दिन दोबारा बल्लेबाजी के लिए मैदान पर लौट आए। श्रीलंका द्वारा भारत का छठा विकेट हासिल किए जाने के बाद पंत क्रीज पर आए।
श्रीलंकाई तेज गेंदबाजों ने उनके खिलाफ छोटी गेंदों की रणनीति जारी रखी। पंत को कंधे के आसपास भी कुछ गेंदें लगीं, लेकिन उन्होंने बल्लेबाजी जारी रखी।
उनके साथ ध्रुव जुरेल मौजूद थे। दोनों बल्लेबाजों ने मिलकर भारतीय पारी को संभालने की कोशिश की। पेय अवकाश तक दोनों ने 47 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी कर भारतीय पारी को स्थिरता प्रदान की।
पंत का मैदान पर वापस आना इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि वह पहले दिन चोट के कारण बाहर चले गए थे। इसके बावजूद उन्होंने अगले दिन फिर से बल्लेबाजी करते हुए टीम के लिए योगदान देने की कोशिश की।
मुश्किल परिस्थितियों में पंत की वापसी
पंत की नई उपलब्धि उनकी बल्लेबाजी शैली का एक और उदाहरण है। चोट की चिंता, तेज गेंदबाजों की लगातार छोटी गेंदें और विपक्षी टीम का दबाव—इन सभी चुनौतियों के बीच उन्होंने मैदान पर वापसी की।
उनका रिकॉर्ड यह बताता है कि विदेशी टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने केवल संख्या नहीं बढ़ाई है, बल्कि कई महत्वपूर्ण मौकों पर भारतीय टीम के लिए निर्णायक भूमिका भी निभाई है।
धोनी को पीछे छोड़ना पंत के टेस्ट करियर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। धोनी भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल विकेटकीपर बल्लेबाजों में से एक रहे हैं और उनके रिकॉर्ड को पार करना पंत के लिए बड़ी उपलब्धि है।
पंत के सामने अब अगली चुनौती
अब पंत की नजरें इस रिकॉर्ड को और मजबूत करने पर होंगी। उन्होंने धोनी को मामूली अंतर से पीछे छोड़ा है, इसलिए आने वाले विदेशी टेस्ट मुकाबलों में वह इस अंतर को काफी बढ़ा सकते हैं।
उनकी बल्लेबाजी में निरंतरता बनी रही और चोटों से वह दूर रहे तो विदेशी टेस्ट क्रिकेट में उनके आंकड़े आने वाले वर्षों में और प्रभावशाली हो सकते हैं।
पंत की कहानी खास इसलिए भी है क्योंकि उन्होंने अपने करियर में गंभीर चुनौतियों का सामना करने के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी की है। उनकी वापसी के बाद से उन्होंने फिर साबित किया है कि वह भारतीय टेस्ट टीम के लिए केवल विकेटकीपिंग का विकल्प नहीं, बल्कि मैच का रुख बदलने वाले प्रमुख बल्लेबाज भी हैं।
कोलंबो में धोनी का रिकॉर्ड पीछे छोड़ना इसी यात्रा का एक और महत्वपूर्ण अध्याय है। 2,501 रन तक पहुंचकर पंत ने विदेशी या तटस्थ टेस्ट मुकाबलों में भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाजों के बीच नया मानक स्थापित कर दिया है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि वह इस आंकड़े को कितनी दूर तक ले जाते हैं।


