नई दिल्ली स्थित लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस प्रवेश को लेकर राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा के वर्ष 2026 के दूसरे चरण की प्रक्रिया उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण हो गई है। यह संस्थान महिलाओं के लिए प्रमुख सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों में शामिल है और यहां एमबीबीएस की सीटों पर प्रवेश राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा के परिणाम तथा चिकित्सा परामर्श समिति की सीट आवंटन प्रक्रिया के आधार पर किया जाता है।
दूसरे चरण के लिए उम्मीदवारों के बीच सबसे अधिक रुचि महाविद्यालय की श्रेणीवार शुरुआती और अंतिम रैंक को लेकर है। पिछले वर्षों के आंकड़ों के आधार पर वर्ष 2026 के दूसरे चरण की संभावित अंतिम रैंक का अनुमान लगाया गया है। हालांकि संभावित रैंक को निश्चित प्रवेश सीमा नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि वास्तविक सीट आवंटन कई कारकों पर निर्भर करता है।
इन कारकों में उपलब्ध सीटों की संख्या, उम्मीदवारों की पसंद, श्रेणी, त्यागी गई सीटें, पिछले चरण में हुए प्रवेश और संबंधित वर्ष की प्रतियोगिता शामिल हैं।
वर्ष 2026 दूसरे चरण की संभावित रैंक
पिछले वर्षों के रुझानों के आधार पर लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में अखिल भारतीय कोटे के लिए वर्ष 2026 के दूसरे चरण की संभावित अंतिम रैंक इस प्रकार बताई गई है:
सामान्य श्रेणी: लगभग 1,129
अन्य पिछड़ा वर्ग: लगभग 1,466
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग: लगभग 1,920
अनुसूचित जाति: लगभग 14,770
अनुसूचित जनजाति: लगभग 34,279
संभावित शुरुआती और अंतिम रैंक के अनुसार सामान्य श्रेणी में शुरुआती रैंक लगभग 450 से 489 और अंतिम रैंक 711 से 1,129 के बीच रह सकती है।
अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए शुरुआती रैंक लगभग 818 से 810 तथा अंतिम रैंक लगभग 1,134 से 1,466 के बीच रहने का अनुमान है।
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग में शुरुआती रैंक लगभग 1,770 से 1,461 और अंतिम रैंक लगभग 1,461 से 1,920 के आसपास रह सकती है।
अनुसूचित जाति के लिए शुरुआती रैंक लगभग 13,242 से 11,052 और अंतिम रैंक लगभग 11,052 से 14,770 तक रहने का अनुमान दिया गया है।
अनुसूचित जनजाति के लिए शुरुआती रैंक लगभग 3,895 से 25,805 और अंतिम रैंक लगभग 25,805 से 34,279 तक बताई गई है।
इन आंकड़ों में कुछ वर्षों के रुझानों के आधार पर अनुमान शामिल हैं, इसलिए उम्मीदवारों को इन्हें केवल संदर्भ के रूप में देखना चाहिए।
वर्ष 2025 के दूसरे चरण की कटऑफ
पिछले वर्ष के दूसरे चरण की सीट आवंटन स्थिति को देखने से उम्मीदवारों को संभावित बदलाव समझने में मदद मिल सकती है।
वर्ष 2025 में सामान्य श्रेणी की शुरुआती रैंक 685 और अंतिम रैंक 1,129 बताई गई थी। अनुसूचित जनजाति के लिए शुरुआती और अंतिम रैंक 34,279 रही।
दिए गए आंकड़ों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की रैंक 3,108 और अनुसूचित जाति की रैंक 14,555 दर्ज की गई थी। अन्य श्रेणियों के आंकड़ों में भी पिछले वर्ष के सीट आवंटन के अनुसार अंतर देखा गया।
पिछले वर्ष के आंकड़ों को वर्तमान वर्ष की अंतिम रैंक के साथ सीधे जोड़कर प्रवेश की गारंटी नहीं मानी जा सकती। हर वर्ष अभ्यर्थियों की संख्या और उनकी पसंद के आधार पर कटऑफ बदल सकती है।
वर्ष 2024 के दूसरे चरण का प्रदर्शन
वर्ष 2024 के दूसरे चरण के आंकड़े भी लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज की प्रतिस्पर्धा को समझने में उपयोगी हैं।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अन्य पिछड़ा वर्ग में शुरुआती रैंक 818 और अंतिम रैंक 1,466 रही। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग में 1,770 की रैंक दर्ज की गई।
अनुसूचित जाति के लिए 13,242 और अनुसूचित जनजाति के लिए 28,885 जैसी रैंक के आंकड़े सामने आए। सामान्य श्रेणी में 2,436 की रैंक भी दर्ज की गई।
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि अलग-अलग श्रेणियों में सीट आवंटन की सीमा काफी अलग हो सकती है। इसलिए उम्मीदवारों को केवल सामान्य श्रेणी की अंतिम रैंक देखकर अपनी संभावना का अनुमान नहीं लगाना चाहिए।
वर्ष 2023 के दूसरे चरण की स्थिति
वर्ष 2023 में भी अखिल भारतीय कोटे के तहत अलग-अलग श्रेणियों में सीट आवंटन हुआ था।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार सामान्य श्रेणी में शुरुआती और अंतिम रैंक 490 रही। अन्य पिछड़ा वर्ग में यह रैंक 1,338 और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग में 1,920 रही।
अनुसूचित जाति के लिए 14,770 की रैंक दर्ज की गई थी।
इसके अलावा दिल्ली विश्वविद्यालय कोटे के अंतर्गत सामान्य श्रेणी में 3,895 और अन्य पिछड़ा वर्ग में 8,706 की रैंक बताई गई थी।
इससे यह भी पता चलता है कि अखिल भारतीय कोटे और दिल्ली विश्वविद्यालय कोटे के बीच सीट आवंटन की रैंक में काफी अंतर हो सकता है।
वर्ष 2026 के पहले चरण की वास्तविक रैंक
दूसरे चरण की संभावनाओं को समझने के लिए वर्ष 2026 के पहले चरण के वास्तविक सीट आवंटन आंकड़े भी महत्वपूर्ण हैं।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अखिल भारतीय कोटे में सामान्य श्रेणी की शुरुआती रैंक 251 और अंतिम रैंक 830 रही। अन्य पिछड़ा वर्ग में शुरुआती रैंक 808 और अंतिम रैंक 870 दर्ज की गई।
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग में शुरुआती रैंक 1,010 और अंतिम रैंक 2,021 रही। अनुसूचित जाति में शुरुआती रैंक 4,556 और अंतिम रैंक 16,744 दर्ज की गई।
अनुसूचित जनजाति में शुरुआती रैंक 8,153 और अंतिम रैंक 15,335 बताई गई है।
इन आंकड़ों की तुलना संभावित दूसरे चरण की रैंक से करने पर उम्मीदवारों को सीट आवंटन के संभावित दायरे को समझने में सहायता मिल सकती है।
दिल्ली विश्वविद्यालय कोटे में भी महत्वपूर्ण अंतर
लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज की सीटों के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय कोटे की रैंक अखिल भारतीय कोटे से अलग रही है।
वर्ष 2026 के पहले चरण में दिल्ली विश्वविद्यालय कोटे के तहत सामान्य श्रेणी की शुरुआती रैंक 3,164 और अंतिम रैंक 7,403 बताई गई।
अन्य पिछड़ा वर्ग में यह सीमा 6,284 से 14,954 रही। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग में शुरुआती रैंक 5,256 और अंतिम रैंक 14,880 रही।
अनुसूचित जाति में शुरुआती रैंक 47,799 और अंतिम रैंक 75,166 दर्ज की गई, जबकि अनुसूचित जनजाति में शुरुआती रैंक 86,925 और अंतिम रैंक 1,23,564 रही।
इसलिए दिल्ली विश्वविद्यालय कोटे के लिए पात्र उम्मीदवारों को अपनी रैंक का आकलन करते समय संबंधित कोटे की कटऑफ को ही आधार बनाना चाहिए।
दूसरे चरण में उम्मीदवारों को क्या देखना चाहिए
दूसरे चरण की काउंसलिंग में उम्मीदवारों के लिए केवल अंतिम रैंक देखना पर्याप्त नहीं है। उन्हें अपनी श्रेणी, पात्रता, कोटा और उपलब्ध सीटों की स्थिति को ध्यान में रखना चाहिए।
पहले चरण में यदि किसी उम्मीदवार को सीट नहीं मिली है, तो दूसरे चरण में उपलब्ध विकल्पों पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा। वहीं जिन उम्मीदवारों ने पहले चरण में सीट प्राप्त की है, उन्हें सीट स्वीकार करने, आगे की पसंद में भाग लेने और संबंधित नियमों का ध्यान रखना होगा।
कटऑफ हर चरण में बदल सकती है। इसका कारण यह है कि कुछ उम्मीदवार सीट छोड़ सकते हैं, कुछ दूसरी संस्थाओं में प्रवेश ले सकते हैं और कुछ उम्मीदवार अपनी पसंद के अनुसार उच्च विकल्प चुन सकते हैं।
रैंक और अंक में अंतर समझना जरूरी
उम्मीदवारों को रैंक और परीक्षा के अंकों के बीच अंतर समझना चाहिए। सीट आवंटन मुख्य रूप से संबंधित परीक्षा की अखिल भारतीय रैंक, श्रेणी और काउंसलिंग नियमों के अनुसार होता है।
इसलिए पिछले वर्ष किसी विशेष श्रेणी में जिस रैंक पर सीट मिली थी, उसी रैंक को अगले वर्ष के लिए निश्चित सीमा मानना सही नहीं होगा।
प्रतियोगिता में बदलाव होने पर अंतिम रैंक ऊपर या नीचे जा सकती है। इसी कारण संभावित कटऑफ को केवल अनुमान के तौर पर इस्तेमाल करना चाहिए।
उम्मीदवार आधिकारिक जानकारी को प्राथमिकता दें
लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस प्रवेश के इच्छुक उम्मीदवारों को चिकित्सा परामर्श समिति द्वारा जारी आधिकारिक सीट आवंटन परिणाम और निर्देशों को सबसे अधिक महत्व देना चाहिए।
अनुमानित कटऑफ उम्मीदवारों को अपनी संभावना समझने में मदद कर सकती है, लेकिन वास्तविक सीट आवंटन आधिकारिक परिणाम में ही स्पष्ट होगा।
उम्मीदवारों को निर्धारित समय सीमा के भीतर पंजीकरण, पसंद भरने, शुल्क भुगतान और दस्तावेजों से जुड़ी सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी करनी चाहिए। किसी भी चरण में गलत जानकारी या समय सीमा चूकने से प्रवेश की संभावना प्रभावित हो सकती है।
लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में प्रवेश अत्यधिक प्रतिस्पर्धी माना जाता है। वर्ष 2026 के पहले चरण की रैंक और पिछले वर्षों के आंकड़ों से भी इसकी प्रतिस्पर्धा का अंदाजा लगाया जा सकता है।
इसलिए दूसरे चरण में भाग लेने वाले उम्मीदवारों के लिए अपनी श्रेणी और कोटे के अनुसार पिछले वर्षों की रैंक का अध्ययन करना उपयोगी होगा। हालांकि अंतिम निर्णय हमेशा आधिकारिक सीट आवंटन और वर्तमान वर्ष की वास्तविक कटऑफ के आधार पर ही लेना चाहिए।


