Sunday, August 23, 2026

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डुलेप ट्रॉफी: टेस्ट वापसी के लिए तनुष कोटियन ने ठोकी मजबूत दस्तक

भारतीय घरेलू क्रिकेट सत्र की शुरुआत तनुष कोटियन के लिए बेहद प्रभावशाली रही। डुलेप ट्रॉफी के क्वार्टर फाइनल मुकाबले में पश्चिम क्षेत्र की ओर से खेलते हुए इस मुंबई के हरफनमौला खिलाड़ी ने उत्तर क्षेत्र के खिलाफ चार विकेट लेकर अपनी उपयोगिता एक बार फिर साबित की। उनके शानदार प्रदर्शन की बदौलत पश्चिम क्षेत्र ने उत्तर क्षेत्र को पहली पारी में 251 रन पर रोक दिया। दिन का खेल समाप्त होने तक पश्चिम क्षेत्र ने दो विकेट खोकर 31 रन बना लिए थे और मुकाबला पूरी तरह बराबरी की स्थिति में दिखाई दे रहा था।

उत्तर क्षेत्र ने टॉस जीतकर बल्लेबाजी का फैसला किया, लेकिन उसे शुरुआत से ही पश्चिम क्षेत्र के गेंदबाजों की चुनौती का सामना करना पड़ा। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि पश्चिम क्षेत्र के कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ ने नई गेंद के साथ तनुष कोटियन से ही गेंदबाजी की शुरुआत कराई। सूखी पिच पर गेंद को शुरुआती दौर से ही अच्छा मोड़ मिल रहा था। पिच में थोड़ी नमी भी थी, जिसके कारण गेंद के पकड़ बनाने की उम्मीद पहले से थी।

कोटियन ने शुरुआती तीन ओवर में विकेट नहीं लिया, लेकिन उन्होंने लगातार सटीक गेंदबाजी करते हुए बल्लेबाजों पर दबाव बनाए रखा। दूसरी ओर शार्दुल ठाकुर और तुषार देशपांडे ने उत्तर क्षेत्र के शीर्ष क्रम को झकझोर दिया। विशेष रूप से देशपांडे ने अपनी तेज गेंदबाजी से बल्लेबाजों को परेशान किया। उन्होंने लगातार लगभग 150 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार के आसपास गेंदबाजी करते हुए क़मरान इकबाल, आयुष बडोनी और अब्दुल समद को पवेलियन भेज दिया।

इकबाल यॉर्कर पर चूके, बडोनी का बल्ला गेंद के बाहर निकला और गेंद विकेटकीपर के दस्तानों में चली गई, जबकि समद के स्टंप उखड़ गए। इन शुरुआती झटकों के बावजूद कोटियन ने अपना धैर्य नहीं खोया और लगातार गेंदबाजी करते रहे।

उनकी मेहनत का परिणाम मध्यक्रम में दिखाई दिया। जब उत्तर क्षेत्र के बल्लेबाज पारी को संभालने की कोशिश कर रहे थे, तब कोटियन लगातार खतरा बने रहे। उन्होंने हवा में गेंद को अच्छी तरह घुमाया, पिच से पर्याप्त मोड़ हासिल किया और अपनी गति तथा दिशा में निरंतरता बनाए रखी।

कोटियन को विशेष रूप से आयुष दोएसजा के खिलाफ सफलता मिली। बाएं हाथ के इस बल्लेबाज को उन्होंने कई बार मुश्किल में डाला। कुछ करीबी पगबाधा अपीलों के बाद आखिरकार कोटियन ने उन्हें शॉर्ट लेग पर कैच करा दिया। यह उनका पहला विकेट था और इसके बाद उनकी गेंदबाजी में आत्मविश्वास और बढ़ गया।

अगले ही ओवर में उन्होंने उत्तर क्षेत्र के कप्तान कन्हैया वाधवान को पगबाधा आउट कर दिया। इसके बाद उन्होंने अंशुल कंबोज को भी अपना शिकार बनाया। कंबोज ने 60 रन की उपयोगी पारी खेली थी। उन्होंने 52 गेंदों का सामना करते हुए एक चौका और चार छक्के लगाए। उनकी चारों छक्के तुषार देशपांडे के खिलाफ आए थे और उनकी पारी ने उत्तर क्षेत्र को संकट से बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

अगर कंबोज की तेज पारी नहीं होती तो उत्तर क्षेत्र का कुल स्कोर 251 रन से काफी कम रह सकता था। पश्चिम क्षेत्र के लिए कोटियन का चार विकेट वाला प्रदर्शन इसलिए और महत्वपूर्ण रहा क्योंकि उन्होंने एक छोर से लगातार दबाव बनाए रखा।

कोटियन ने गेंदबाजी के अलावा क्षेत्ररक्षण में भी अपनी छाप छोड़ी। उन्होंने दो बेहतरीन डाइव लगाकर कैच पकड़े। इनमें से एक कैच उन्होंने अपनी ही गेंद पर शानदार प्रतिक्रिया दिखाते हुए लिया। इस तरह उन्होंने मैच के पहले ही दिन गेंद और क्षेत्ररक्षण दोनों में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

कोटियन के लिए यह प्रदर्शन इसलिए भी अहम है क्योंकि वह भारतीय टेस्ट टीम में वापसी की दौड़ में बने हुए हैं। वह पहले रविचंद्रन अश्विन की जगह भारतीय टेस्ट दल में शामिल किए जा चुके हैं, लेकिन इसके बाद चयन की दौड़ में उनकी स्थिति कुछ कमजोर हुई है। श्रीलंका के खिलाफ भारत की ओर से सारांश जैन को मौका मिलना भी इस प्रतिस्पर्धा का संकेत था।

इसके बावजूद कोटियन ने हार नहीं मानी है। उनका मानना है कि चयन उनके हाथ में नहीं, लेकिन प्रदर्शन उनके नियंत्रण में जरूर है। श्रीलंका में भारत की ओर से खेलते हुए उन्हें अभ्यास सत्रों में काफी गेंदबाजी करने का अवसर मिला था। मुंबई में बारिश के कारण बाहरी अभ्यास सीमित रहा, लेकिन श्रीलंका में उन्हें अच्छी परिस्थितियों में अभ्यास करने और शीर्ष स्तर के बल्लेबाजों को गेंदबाजी करने का मौका मिला।

कोटियन ने अपने गेंदबाजी कौशल में भी कई बदलाव किए हैं। उन्होंने अपनी दौड़ और गेंद छोड़ने के कोण पर काम किया है। हवा की दिशा को समझकर गेंद में बहाव पैदा करने पर भी उन्होंने विशेष ध्यान दिया। इसके लिए उन्होंने भारतीय क्रिकेट के अनुभवी गेंदबाजों और प्रशिक्षकों से काफी कुछ सीखा।

आईपीएल के दौरान उन्होंने रविंद्र जडेजा की गेंदबाजी को करीब से समझने की कोशिश की। इसके अलावा सैराज बहुतुले के साथ काम किया। बाद में गेंदबाजों के विशेष शिविर में सुनील जोशी से भी उन्होंने मार्गदर्शन लिया और मुंबई में जतिन परांजपे के साथ अपनी तकनीक में और सुधार किया।

पश्चिम क्षेत्र के कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ को भी कोटियन की क्षमता पर भरोसा था। श्रीलंका में उनके साथ रहने के दौरान गायकवाड़ ने उनकी गेंदबाजी को करीब से देखा था। इसलिए जब पिच पर गेंद के मोड़ लेने के संकेत मिले तो उन्होंने कोटियन को लगातार इस्तेमाल किया।

कोटियन ने भी कप्तान के भरोसे को पूरी तरह सही साबित किया। उन्होंने 20.5 ओवर गेंदबाजी की और 72 रन देकर चार विकेट हासिल किए। उनकी गेंदबाजी में नियंत्रण, बहाव और मोड़ तीनों का अच्छा मिश्रण दिखाई दिया।

मैच के बाद कोटियन ने साफ किया कि उनका ध्यान चयन की चर्चा पर नहीं, बल्कि हर अवसर का पूरा लाभ उठाने पर है। उनका लक्ष्य हर पारी में बेहतर प्रदर्शन करना है। वह गेंदबाजी में विकेट लेने और बल्लेबाजी में टीम के लिए रन बनाने पर ध्यान देना चाहते हैं।

उनका संदेश स्पष्ट है—चयनकर्ताओं का काम चयन करना है और उनका काम मैदान पर प्रदर्शन करना। मुंबई के लिए वह लगातार गेंद और बल्ले से योगदान देते रहे हैं और अब घरेलू सत्र की शुरुआत भी उन्होंने उसी अंदाज में की है।

डुलेप ट्रॉफी में चार विकेट और दो शानदार कैच के साथ कोटियन ने भारतीय टेस्ट टीम में वापसी की अपनी दावेदारी को मजबूत किया है। आगे के मुकाबलों में उनका बल्ले से प्रदर्शन भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा। यदि वह लगातार विकेट लेने के साथ उपयोगी रन बनाने में सफल रहते हैं, तो चयनकर्ताओं के लिए उन्हें नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा। फिलहाल, कोटियन ने गेंद के साथ अपना संदेश साफ तौर पर दे दिया है—वह टेस्ट क्रिकेट की दौड़ से बाहर नहीं हुए हैं।

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