उत्तर दिल्ली में नकदी लूट के दौरान एक व्यक्ति की चाकू मारकर हत्या के मामले में पुलिस ने उसके चचेरे भाई समेत चार आरोपियों को पकड़ने का दावा किया है। पुलिस के अनुसार, मृतक की नकदी आवाजाही की जानकारी कथित तौर पर उसके चचेरे भाई ने ही आरोपियों तक पहुंचाई थी। इसी सूचना के आधार पर बदमाशों ने रास्ते में उसे रोककर लूट की कोशिश की और विरोध करने पर चाकू से हमला कर दिया।
पुलिस ने इस मामले में मृतक के चचेरे भाई ओम सिंह, दीपु राठौर, अभिषेक और एक नाबालिग को पकड़ा है। पुलिस के अनुसार, वारदात में शामिल तीन अन्य आरोपी अभी फरार हैं। उनकी तलाश में अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी की जा रही है।
बाजार से रकम लेकर लौट रहा था पीड़ित
पुलिस के अनुसार, मृतक प्रभात 24 सितंबर को गांधी नगर बाजार से दुकानों से भुगतान की रकम एकत्र करके लौट रहा था। उसके साथ उसका भतीजा सचिन भी था। दोनों एक ई-रिक्शा से वापस जा रहे थे।
शाम करीब 7 बजकर 20 मिनट पर जब उनका ई-रिक्शा नीली छतरी मंदिर के नीचे बने मार्ग के पास पहुंचा, तभी हथियारों से लैस चार लोगों ने कथित तौर पर उन्हें रोक लिया।
आरोपियों ने नकदी से भरी पॉलीथिन छीनने की कोशिश की। पुलिस के मुताबिक, प्रभात ने इसका विरोध किया। इसके बाद आरोपियों ने प्रभात, सचिन और ई-रिक्शा में मौजूद एक अन्य यात्री पर चाकू से हमला कर दिया।
हमले में प्रभात गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
इस घटना के संबंध में 25 सितंबर को कश्मीरी गेट थाने में मामला दर्ज किया गया।
500 से अधिक कैमरों की जांच
हत्या और लूट की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच के दौरान 500 से अधिक निगरानी कैमरों की रिकॉर्डिंग खंगाली। इनमें नीली छतरी मंदिर के नीचे बने मार्ग और उसके आसपास लगाए गए करीब 150 कैमरों की रिकॉर्डिंग भी शामिल थी।
इसके अलावा वाहनों की नंबर प्लेट पहचानने वाले स्वचालित कैमरों की रिकॉर्डिंग का भी विश्लेषण किया गया।
जांच के दौरान पुलिस टीम को एक वाहन की गतिविधि संदिग्ध लगी। पुलिस के अनुसार, वारदात के आसपास एक कार तेज गति से अचानक मुड़ी और सलिमगढ़ किले की दिशा में चली गई। कैमरे में वाहन काफी दूरी से दिखाई दिया था और दृश्यता कम होने के कारण शुरुआत में उसकी पहचान करना मुश्किल था।
बाद में अलग-अलग कैमरों की रिकॉर्डिंग को जोड़कर और तकनीकी निगरानी की सहायता से पुलिस ने वाहन की नंबर प्लेट की पहचान करने की कोशिश की।
नकली नंबर प्लेट का शक
पुलिस के अनुसार, जांच में जिस नंबर की पहचान हुई, वह नोएडा निवासी भगत सिंह के नाम पर पंजीकृत वाहन से जुड़ा था। हालांकि, कैमरे में दिखाई दे रहा वाहन उस पंजीकृत वाहन से अलग था।
इससे पुलिस को संदेह हुआ कि वारदात में इस्तेमाल किए गए वाहन पर कथित तौर पर फर्जी नंबर प्लेट लगाई गई थी।
जांचकर्ताओं ने इसके बाद एक अन्य वाहन की गतिविधियों का पता लगाया, जिस पर उत्तर प्रदेश का पंजीकरण नंबर था। निगरानी कैमरों की रिकॉर्डिंग में यह वाहन वारदात से लगभग दो घंटे पहले यमुना की दिशा से लोहे के पुल के रास्ते नीली छतरी मंदिर के नीचे बने मार्ग की ओर आता दिखाई दिया।
पुलिस के मुताबिक, उस समय वाहन में पांच से छह लोग बैठे हुए थे।
वाहन के मालिक तक पहुंची पुलिस
लगातार कैमरा रिकॉर्डिंग का विश्लेषण करने के बाद पुलिस ने कथित तौर पर वाहन की पहचान कर ली। जांच में वाहन का पंजीकृत मालिक दीपु राठौर निकला, जो उत्तर प्रदेश के झांसी का रहने वाला है।
इसके बाद पुलिस ने दीपु के दूरभाष संपर्कों की जानकारी का विश्लेषण किया। जांचकर्ताओं को एक ऐसा मोबाइल नंबर मिला, जो दीपु और मृतक प्रभात दोनों के संपर्क में था।
पुलिस के अनुसार, यह मोबाइल नंबर कानपुर निवासी ओम सिंह का था। ओम सिंह प्रभात का चचेरा भाई बताया गया है।
इसके बाद पुलिस की अलग-अलग टीमें कानपुर, झांसी और इटावा भेजी गईं।
चचेरे भाई ने बताई नकदी की जानकारी
पुलिस के अनुसार, कानपुर से ओम सिंह को पकड़ा गया। झांसी से दीपु और 16 वर्षीय नाबालिग को पकड़ा गया, जबकि एक अन्य आरोपी अभिषेक को इटावा से गिरफ्तार किया गया, जहां वह कथित तौर पर छिपा हुआ था।
पूछताछ के दौरान पुलिस को ओम से कथित तौर पर प्रभात की नकदी आवाजाही से जुड़ी जानकारी मिली। पुलिस के अनुसार, ओम ने बताया कि प्रभात उसके बुआ का बेटा था और उसने कथित तौर पर उसकी नकदी के बारे में दीपु तथा फरार आरोपी राज को जानकारी दी थी।
पुलिस का आरोप है कि इसी जानकारी के आधार पर लूट की योजना तैयार की गई।
नोएडा में बनी थी कथित योजना
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर नोएडा में लूट की योजना बनाई थी। इसके बाद वे दीपु की कार से नीली छतरी मंदिर के नीचे बने मार्ग की ओर रवाना हुए।
जांच एजेंसियों के अनुसार, दीपु अपने गांव से रोहित यादव और एक नाबालिग को लेकर आया था। दूसरी ओर, राज और ओम ने कथित तौर पर अनिरुद्ध चौहान तथा अभिषेक से संपर्क किया।
पुलिस का कहना है कि अभिषेक अलग से मोटरसाइकिल से घटनास्थल पर पहुंचा था।
इसके बाद आरोपियों ने कथित तौर पर प्रभात और उसके साथ मौजूद लोगों को निशाना बनाया। नकदी लूटने के दौरान प्रभात के विरोध करने पर उस पर चाकू से हमला किया गया।
लूटी गई रकम का हिस्सा बरामद
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से लूटी गई रकम में से 2.29 लाख रुपये बरामद करने की बात कही है।
पुलिस के अनुसार, अभिषेक के पास से 1.10 लाख रुपये, दीपु के पास से 19,800 रुपये और नाबालिग के पास से 1 लाख रुपये बरामद किए गए हैं।
जांचकर्ताओं का कहना है कि वारदात के बाद आरोपी कथित तौर पर नोएडा लौटे थे। वहां लूटी गई रकम को आपस में बांटने के बाद सभी अलग-अलग स्थानों पर चले गए, ताकि पुलिस की पकड़ से बच सकें।
आरोपियों के पुराने मामलों की भी जांच
पुलिस के अनुसार, 28 वर्षीय दीपु राठौर के खिलाफ उत्तर प्रदेश में पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें दुष्कर्म, हत्या के प्रयास, जबरन वसूली और दंगा जैसे आरोपों से जुड़े मामले शामिल हैं।
पुलिस ने यह भी बताया कि उसके खिलाफ बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण संबंधी कानून, गुंडा कानून और गिरोहबंद अपराधों से संबंधित कानून के तहत भी मामले दर्ज रहे हैं।
पुलिस के अनुसार, 16 वर्षीय नाबालिग का नाम इससे पहले झांसी में दुष्कर्म, बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण संबंधी कानून और अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण कानून से जुड़े मामलों में सामने आ चुका है।
इन पुराने मामलों के संबंध में भी पुलिस रिकॉर्ड की जांच कर रही है।
तीन आरोपी अभी फरार
पुलिस के अनुसार, लूट और हत्या की कथित साजिश तथा वारदात को अंजाम देने में शामिल राज, अनिरुद्ध चौहान और रोहित यादव अभी फरार हैं।
पुलिस की टीमें इन तीनों आरोपियों की तलाश में अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी कर रही हैं। जांचकर्ताओं का ध्यान निगरानी कैमरों की रिकॉर्डिंग, दूरभाष संपर्कों और आरोपियों की आवाजाही से जुड़े अन्य साक्ष्यों पर भी है।
इस मामले में पुलिस ने निगरानी कैमरों की बड़ी संख्या में रिकॉर्डिंग का विश्लेषण कर वाहन की गतिविधियों का पता लगाया और फिर कथित तौर पर दूरभाष संपर्कों के माध्यम से मृतक के चचेरे भाई तक पहुंच बनाई।
फिलहाल पुलिस फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और लूट की पूरी रकम बरामद करने के प्रयास में जुटी है। मामले की जांच जारी है और आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होगी।


