Monday, October 19, 2026

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हरदोई में भाई ने एक घंटे में मारे 150 थप्पड़, बची जान

उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में सांप के काटने के बाद एक युवक की जान बचाने के लिए उसके बड़े भाई ने करीब एक घंटे तक उसे बार-बार थप्पड़ मारे। यह घटना पहली नजर में हैरान करने वाली लग सकती है, लेकिन इसके पीछे गुस्सा या विवाद नहीं, बल्कि अपने भाई को होश में बनाए रखने की मजबूरी थी। चिकित्सकों के निर्देश पर बड़े भाई ने उस समय युवक को सोने या बेहोशी की स्थिति में जाने से रोकने का हर संभव प्रयास किया।

बताया जा रहा है कि हरदोई के ग्रामीण कोतवाली क्षेत्र के ज्योति नगर में 21 वर्षीय अरुण अपने बड़े भाई आकाश के खेत में फसल की सिंचाई करने गया था। दोपहर करीब दो बजे खेत में काम करने के दौरान वह चारे की एक बोरी उठाने लगा। इसी दौरान बोरी के भीतर छिपे जहरीले सांप ने उसे काट लिया।

सांप के काटने के कुछ ही समय बाद अरुण की तबीयत बिगड़ने लगी। जहर का असर बढ़ने के साथ उसकी हालत गंभीर होती चली गई। वह अत्यधिक उनींदापन महसूस करने लगा और बार-बार उसकी आंखें बंद होने लगीं। स्थिति को देखते हुए परिवार के लोगों ने उसे तत्काल उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाने की कोशिश शुरू की।

खेत में काम करते समय सांप ने काटा

अरुण उस समय अपने बड़े भाई आकाश के खेत में फसल को पानी देने के लिए गया था। खेत में काम करते हुए जब उसने चारे की बोरी को उठाया, तभी उसके भीतर छिपे सांप ने उसे डस लिया। अचानक हुई इस घटना से परिवार में अफरा-तफरी मच गई।

सांप के काटने के बाद अरुण की हालत लगातार बिगड़ने लगी। परिवार को समझ आ गया कि समय गंवाना उसके लिए बेहद खतरनाक हो सकता है। आकाश ने अपने भाई को तत्काल अस्पताल ले जाने का फैसला किया और उसे लेकर तेजी से रवाना हुआ।

इसी दौरान रास्ते में एक औषधि विक्रेता शिवम शर्मा की नजर दोनों भाइयों पर पड़ी। बताया जाता है कि उन्होंने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए मदद की और अरुण को चिकित्सा महाविद्यालय पहुंचाने में सहयोग किया। संकट की इस घड़ी में मिली तत्काल सहायता उपचार शुरू कराने में महत्वपूर्ण साबित हुई।

चिकित्सकों ने कहा, युवक को सोने न दें

चिकित्सा महाविद्यालय पहुंचते ही चिकित्सकों ने अरुण का उपचार शुरू किया। चिकित्सकों के अनुसार, सांप के विष का असर उसके तंत्रिका तंत्र पर पड़ना शुरू हो गया था। इसके कारण वह बेहद सुस्त हो रहा था और बार-बार उसकी आंखें बंद हो रही थीं।

अरुण की गंभीर स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने उसके परिजनों को उसे लगातार जागृत रखने की कोशिश करने के लिए कहा। परिवार के लिए यह बेहद कठिन परिस्थिति थी। एक ओर अरुण की हालत बिगड़ रही थी, वहीं दूसरी ओर तत्काल उपचार के साथ उसे होश में बनाए रखना भी जरूरी बताया गया।

आकाश ने चिकित्सकों की सलाह को गंभीरता से लिया और पूरे समय अपने भाई के पास मौजूद रहा। जब भी अरुण की आंखें बंद होने लगतीं या वह बेहोशी की ओर जाता दिखाई देता, आकाश उसे थप्पड़ मारकर जगाने का प्रयास करता। करीब एक घंटे तक यह सिलसिला चलता रहा।

एक घंटे में 150 से अधिक थप्पड़

बताया जा रहा है कि आकाश ने लगभग एक घंटे के दौरान अरुण को 150 से अधिक बार थप्पड़ मारे। सामान्य परिस्थितियों में यह व्यवहार बेहद असामान्य लग सकता है, लेकिन उस समय आकाश का उद्देश्य अपने भाई को नुकसान पहुंचाना नहीं था। वह चिकित्सकों के निर्देश के अनुसार उसे जागृत रखने की कोशिश कर रहा था।

हर बार जब अरुण की चेतना कमजोर पड़ती, आकाश उसे आवाज देता और थप्पड़ मारकर प्रतिक्रिया लेने का प्रयास करता। परिवार के लिए यह बेहद तनावपूर्ण समय था। अरुण की हालत गंभीर थी और उसके शरीर में विष का प्रभाव बढ़ रहा था।

इस घटना ने यह भी दिखाया कि सांप के काटने के बाद शुरुआती समय कितना महत्वपूर्ण हो सकता है। परिवार ने देर करने के बजाय घायल युवक को तत्काल चिकित्सा केंद्र पहुंचाने की कोशिश की, जिससे उसे समय पर उपचार मिल सका।

विषरोधी दवा की 15 खुराक दी गईं

चिकित्सकों ने अरुण की स्थिति का आकलन करने के बाद उसके उपचार के लिए विषरोधी दवा की 15 खुराक दीं। चिकित्सकों के अनुसार, विष का प्रभाव उसके शरीर में काफी बढ़ चुका था और तत्काल चिकित्सा उपचार की आवश्यकता थी।

लगातार निगरानी, आवश्यक उपचार और विषरोधी दवा दिए जाने के बाद धीरे-धीरे अरुण की स्थिति में सुधार आने लगा। उपचार के दौरान उसके भाई ने भी उसके पास रहकर चिकित्सकों के निर्देशों का पालन किया।

काफी प्रयासों के बाद अरुण गंभीर स्थिति से बाहर निकलने में सफल रहा। परिवार के लिए यह राहत की बड़ी खबर थी, क्योंकि सांप के काटने के बाद उसकी हालत तेजी से खराब हो रही थी।

समय पर उपचार से मिली जिंदगी

सांप के काटने की घटनाओं में समय पर चिकित्सा सहायता बेहद महत्वपूर्ण होती है। इस मामले में अरुण को अस्पताल पहुंचाने में परिवार ने देरी नहीं की। रास्ते में मिली सहायता और चिकित्सा महाविद्यालय में तत्काल उपचार शुरू होने से स्थिति को संभालने में मदद मिली।

इस घटना में सबसे भावुक पहलू दोनों भाइयों के बीच दिखाई दिया संबंध रहा। आकाश ने अपने भाई को बचाने के लिए चिकित्सकों के निर्देश के अनुसार लगातार प्रयास किया। उसका उद्देश्य केवल इतना था कि अरुण उपचार के दौरान चेतना न खोए और चिकित्सकों को उसकी स्थिति पर नजर रखने में मदद मिलती रहे।

हालांकि किसी व्यक्ति को सांप के काटने के बाद केवल जगाए रखने के प्रयास पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। ऐसे मामलों में सबसे महत्वपूर्ण कदम पीड़ित को जल्द से जल्द उचित चिकित्सा केंद्र तक पहुंचाना और विशेषज्ञ चिकित्सकों से उपचार कराना है। घरेलू उपचार या झाड़-फूंक के कारण अस्पताल पहुंचने में देरी गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है।

हरदोई की यह घटना इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इसमें एक भाई ने अपने भाई की जिंदगी बचाने के लिए बेहद कठिन परिस्थिति में लगातार प्रयास किया। 15 विषरोधी खुराक और चिकित्सकीय देखभाल के बाद अरुण की जान बच गई। घटना ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि सांप के काटने के मामलों में घबराने के बजाय तेजी से उचित चिकित्सा सहायता लेना सबसे जरूरी है।

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