देश की प्रमुख सूचना प्रौद्योगिकी सेवा कंपनियों में शामिल इंफोसिस और विप्रो के शेयरों में मंगलवार को एक बार फिर भारी गिरावट देखने को मिली। लगातार बिकवाली के बीच दोनों कंपनियों के शेयर छह साल के निचले स्तर के आसपास पहुंच गए। इस गिरावट ने घरेलू सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र को लेकर निवेशकों की बढ़ती चिंता को एक बार फिर सामने ला दिया है।
मंगलवार के कारोबार के दौरान इंफोसिस का शेयर एक बार फिर 1,000 रुपये के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे चला गया। कारोबार के दौरान शेयर लगभग 980 रुपये तक फिसल गया। हालांकि, बाद में इसमें कुछ सुधार हुआ और कारोबार का अंत इसी के आसपास के स्तरों पर हुआ। इन स्तरों पर इंफोसिस का शेयर आखिरी बार अक्टूबर 2020 के दौरान देखा गया था।
वहीं, विप्रो के शेयर में भी लगभग 3 प्रतिशत की अतिरिक्त गिरावट दर्ज की गई और शेयर करीब 156 रुपये तक पहुंच गया। सितंबर में अब तक विप्रो के शेयर में लगभग 15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हो चुकी है। लगातार कमजोर प्रदर्शन के कारण कंपनी का बाजार मूल्यांकन भी 1.6 लाख करोड़ रुपये से नीचे खिसक गया है।
आईटी शेयरों में व्यापक बिकवाली
इंफोसिस और विप्रो की गिरावट किसी एक कंपनी तक सीमित नहीं है। घरेलू सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों के शेयरों में वर्ष की शुरुआत से ही दबाव बना हुआ है। क्षेत्र से जुड़े प्रमुख शेयरों में लगातार बिकवाली के कारण सूचना प्रौद्योगिकी सूचकांक इस वर्ष के कमजोर प्रदर्शन वाले प्रमुख क्षेत्रीय सूचकांकों में शामिल हो गया है।
निवेशकों के बीच सबसे बड़ी चिंता कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी है। बाजार में यह आशंका बनी हुई है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीक पारंपरिक सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं की मांग, काम करने के तरीकों और कंपनियों की आय संरचना को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, कृत्रिम बुद्धिमत्ता से मिलने वाले दीर्घकालिक अवसर भी मौजूद हैं, लेकिन फिलहाल निवेशक इस बदलाव के संभावित प्रभावों और कंपनियों की भविष्य की आय को लेकर अधिक सतर्क दिखाई दे रहे हैं।
इसके अलावा, सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों की आय वृद्धि को लेकर भी उम्मीदें कमजोर हुई हैं। कई कंपनियों की ओर से आने वाले समय के लिए सावधानीपूर्ण संकेत दिए गए हैं। कमजोर मार्गदर्शन ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है और शेयरों पर बिकवाली का दबाव कायम रखा है।
अमेरिका की ब्याज दरों को लेकर चिंता
सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के लिए अमेरिकी अर्थव्यवस्था और वहां की कंपनियों से मिलने वाली मांग बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बाजार की अपेक्षाओं का असर भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी शेयरों पर भी पड़ता है।
अमेरिकी केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति को लेकर बदलती अपेक्षाओं ने भी बाजार में अस्थिरता बढ़ाई है। ब्याज दरों में संभावित बदलाव के कारण वैश्विक निवेशकों के बीच जोखिम वाली परिसंपत्तियों को लेकर रुख प्रभावित हुआ है। इसका असर भारतीय शेयर बाजार और विशेष रूप से उन कंपनियों पर पड़ा है जिनकी आय का बड़ा हिस्सा विदेशी बाजारों से आता है।
इसके साथ ही विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली ने भी घरेलू शेयरों पर दबाव बढ़ाया है। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के बड़े शेयरों में विदेशी निवेशकों की अच्छी हिस्सेदारी होने के कारण उनकी बिकवाली का प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक दिखाई देता है।
इंफोसिस का बाजार मूल्यांकन भारी घटा
इंफोसिस के शेयर में आई गिरावट ने कंपनी के बाजार मूल्यांकन को भी काफी प्रभावित किया है। वर्ष 2026 में अब तक कंपनी के बाजार मूल्य में लगभग 2.43 लाख करोड़ रुपये की कमी आ चुकी है। मंगलवार के कारोबार के बाद कंपनी का बाजार मूल्यांकन लगभग 4 लाख करोड़ रुपये के आसपास रह गया।
एक समय इंफोसिस का बाजार मूल्यांकन लगभग 8.37 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया था। इस लिहाज से मौजूदा स्तर कंपनी के लिए काफी बड़ी गिरावट को दर्शाते हैं।
इंफोसिस के शेयर में फरवरी से लगातार कमजोरी बनी हुई है। वर्ष के दौरान शेयर में लगभग 37 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इससे पहले पिछले वर्ष भी शेयर करीब 14 प्रतिशत कमजोर हुआ था। पिछले लगभग 18 महीनों में कंपनी के शेयर में संचयी गिरावट लगभग 47 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
अपने रिकॉर्ड स्तर करीब 2,006 रुपये से तुलना की जाए तो इंफोसिस का शेयर आधे से अधिक मूल्य खो चुका है। किसी बड़ी और स्थापित कंपनी के शेयर में इतनी बड़ी गिरावट बाजार में मौजूद दीर्घकालिक चिंताओं को दर्शाती है।
इस गिरावट का असर घरेलू निवेशकों और म्यूचुअल फंडों पर भी पड़ा है। घरेलू म्यूचुअल फंड कंपनियों के प्रमुख निवेशकों में शामिल हैं और शेयर मूल्य में तेज गिरावट से उनके निवेश का बाजार मूल्य भी प्रभावित हुआ है।
विप्रो पर भी लगातार दबाव
विप्रो का प्रदर्शन भी इस वर्ष बड़े सूचना प्रौद्योगिकी शेयरों में कमजोर रहा है। कंपनी के शेयर में फरवरी 2025 से गिरावट का दौर शुरू हुआ था, जो बाद में लंबी अवधि की कमजोरी में बदल गया।
वर्ष 2026 के दौरान कई मौकों पर शेयर में सुधार की कोशिश हुई, लेकिन हर बार ऊपरी स्तरों पर दोबारा बिकवाली देखने को मिली। इससे शेयर में स्थायी सुधार की उम्मीद कमजोर हुई और निवेशकों का भरोसा भी प्रभावित हुआ।
पिछले नौ महीनों में विप्रो के शेयर ने पांच महीनों में गिरावट दर्ज की है। जून में शेयर लगभग 16.5 प्रतिशत टूट गया था, जबकि सितंबर में अब तक इसमें लगभग 15 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है।
वर्ष 2026 में अब तक विप्रो के शेयर का मूल्य लगभग 40 प्रतिशत घट चुका है। इस तेज गिरावट ने कंपनी को बड़े पूंजीकरण वाली सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों में कमजोर प्रदर्शन करने वाली प्रमुख कंपनियों में ला दिया है।
विप्रो के शेयर में मौजूदा गिरावट की तुलना पिछले वर्षों के प्रदर्शन से भी की जा रही है। वर्ष 2008 में कंपनी के शेयर में लगभग 55 प्रतिशत और वर्ष 2022 में लगभग 45 प्रतिशत की वार्षिक गिरावट दर्ज की गई थी। मौजूदा वर्ष की गिरावट ने एक बार फिर कंपनी के दीर्घकालिक विकास को लेकर बाजार की चिंताओं को उजागर किया है।
आगे क्या देखेंगे निवेशक
अब निवेशकों की नजर सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों की आगामी तिमाही आय, नए सौदों, अमेरिकी मांग, लागत नियंत्रण और प्रबंधन के भविष्य संबंधी संकेतों पर रहेगी। इसके साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता से संबंधित निवेश, सेवाओं की मांग और कंपनियों की आय पर इसके वास्तविक प्रभाव को भी बाजार बारीकी से देखेगा।
इंफोसिस और विप्रो के शेयरों में लगातार गिरावट से यह स्पष्ट है कि सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र इस समय कई वैश्विक और घरेलू दबावों से गुजर रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता को लेकर अनिश्चितता, कमजोर आय वृद्धि, सावधानीपूर्ण प्रबंधन संकेत, अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदें और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने मिलकर क्षेत्र के शेयरों पर दबाव बढ़ाया है।
हालांकि, आने वाले समय में कंपनियों की वास्तविक आय वृद्धि, नई तकनीकों को अपनाने की क्षमता और वैश्विक मांग की स्थिति यह तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी कि क्षेत्र में मौजूदा कमजोरी कितने समय तक बनी रहती है।


