Monday, October 19, 2026

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नर्सिंग परीक्षा में प्रश्नपत्र की तस्वीर खींचने पर पांच गिरफ्तार

महाराष्ट्र के परभणी जिले में नर्सिंग की परीक्षा के दौरान कथित रूप से प्रश्नपत्र की तस्वीर खींचकर उसे दूसरे व्यक्ति तक पहुंचाने के मामले में पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, परीक्षा केंद्र पर तैनात एक महिला पर्यवेक्षक ने परीक्षा शुरू होने के कुछ ही मिनट बाद अपने मोबाइल फोन से प्रश्नपत्र की तस्वीर खींची और उसे अपनी बहन के पास भेज दिया। मामला सामने आने के बाद परीक्षा केंद्र में हड़कंप मच गया और पुलिस ने जांच शुरू कर पांच लोगों को हिरासत में लिया।

यह कथित नकल प्रकरण शुक्रवार को परभणी स्थित इंदिरा गांधी एएनएम नर्सिंग विद्यालय में सामने आया। यहां प्रथम वर्ष के सामान्य परिचर्या एवं प्रसूति विज्ञान पाठ्यक्रम की परीक्षा आयोजित की जा रही थी। परीक्षा निर्धारित समय के अनुसार सुबह साढ़े दस बजे शुरू हुई थी। आरोप है कि परीक्षा शुरू होने के कुछ ही समय बाद केंद्र पर पर्यवेक्षक के रूप में तैनात राखी चव्हाण ने प्रश्नपत्र की तस्वीर अपने मोबाइल फोन से खींच ली।

पुलिस के मुताबिक, तस्वीर लेने के बाद राखी ने उसे अपनी बहन रानी चव्हाण के पास भेज दिया। कथित तौर पर यह तस्वीर संदेश भेजने वाले एक लोकप्रिय माध्यम के जरिए साझा की गई थी। मामले का खुलासा उस समय हुआ, जब परीक्षा केंद्र पर निरीक्षण के लिए केंद्रीय निरीक्षक पहुंचे।

निरीक्षण के दौरान खुला मामला

परीक्षा के दौरान केंद्रीय निरीक्षकों को संदेह हुआ कि प्रश्नपत्र परीक्षा केंद्र से बाहर भेजा गया है। इसके बाद केंद्र निरीक्षक विश्वजीत माथापति ने महिला पर्यवेक्षक की जांच की। तलाशी के दौरान जब उसके मोबाइल फोन की जांच की गई, तो उसमें प्रश्नपत्र की तस्वीर मौजूद मिली।

मोबाइल फोन में प्रश्नपत्र की तस्वीर मिलने के बाद पूरे मामले की जानकारी पुलिस को दी गई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर आगे की कार्रवाई शुरू की। अधिकारियों के अनुसार, परीक्षा को बीच में रोका नहीं गया और वह निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी रही।

पुलिस की जांच में इस मामले में केवल पर्यवेक्षक और उसकी बहन ही नहीं, बल्कि तीन अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आई। इसके बाद पुलिस ने राखी चव्हाण, उसकी बहन रानी चव्हाण, प्रतीक्षा किरण खिल्लारे, ईश्वर बरबोइना और दिलीप बोरकर को गिरफ्तार किया।

परीक्षा केंद्र पर बढ़ी निगरानी

परीक्षा में प्रश्नपत्र की तस्वीर खींचे जाने की घटना ने परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। प्रश्नपत्र परीक्षा शुरू होने के बाद भी परीक्षा केंद्र के भीतर सुरक्षित रखा जाना और उसकी गोपनीयता बनाए रखना परीक्षा प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।

इस मामले में आरोप है कि परीक्षा की निगरानी के लिए नियुक्त व्यक्ति ने ही प्रश्नपत्र की तस्वीर अपने मोबाइल फोन से खींची। यही वजह है कि केंद्रीय निरीक्षकों की सतर्कता से कथित अनियमितता का समय रहते पता चल गया।

अगर निरीक्षण के दौरान मोबाइल फोन की जांच नहीं की जाती, तो प्रश्नपत्र की तस्वीर परीक्षा केंद्र से बाहर भेजे जाने की संभावना बनी रहती। हालांकि, पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि तस्वीर भेजे जाने के बाद उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाना था और इस पूरे मामले में गिरफ्तार किए गए अन्य लोगों की वास्तविक भूमिका क्या थी।

पांच लोगों पर मामला दर्ज

पुलिस ने केंद्र निरीक्षक की शिकायत के आधार पर पांचों आरोपियों के खिलाफ महाराष्ट्र परीक्षा अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। इस कानून के तहत परीक्षा में अनुचित साधनों और कथित नकल से जुड़े मामलों में कार्रवाई की जा सकती है।

पुलिस मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि प्रश्नपत्र की तस्वीर केवल एक व्यक्ति को भेजी गई थी या उसे आगे अन्य लोगों तक भी पहुंचाया गया। साथ ही, यह भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि आरोपियों के बीच पहले से किसी प्रकार का संपर्क था या परीक्षा के दौरान ही कथित योजना बनाई गई थी।

परीक्षा प्रक्रिया रही जारी

इस घटना के बावजूद परीक्षा को निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी रखा गया। अधिकारियों के अनुसार, प्रश्नपत्र की तस्वीर मिलने के बाद पुलिस को तुरंत सूचित किया गया, लेकिन परीक्षा में व्यवधान नहीं आने दिया गया।

यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि परीक्षा के दौरान किसी कथित अनियमितता के कारण पूरी परीक्षा प्रक्रिया प्रभावित हो सकती थी। केंद्र पर मौजूद अधिकारियों ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए परीक्षा को जारी रखा और मामले को जांच के लिए पुलिस के हवाले कर दिया।

नर्सिंग विद्यार्थियों पर भी असर

नर्सिंग जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रम की परीक्षाओं में प्रश्नपत्र की गोपनीयता और निष्पक्षता बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे पाठ्यक्रमों में परीक्षा केवल विद्यार्थियों के ज्ञान का आकलन नहीं करती, बल्कि भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी जिम्मेदारियों के लिए उनकी तैयारी को भी परखती है।

यदि किसी परीक्षा में प्रश्नपत्र पहले से उपलब्ध हो जाए, तो मेहनत करने वाले विद्यार्थियों के साथ अन्याय हो सकता है। इससे परीक्षा की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठते हैं। इसलिए परीक्षा केंद्रों पर प्रश्नपत्र की सुरक्षा, मोबाइल फोन के उपयोग पर नियंत्रण और निरीक्षण व्यवस्था को मजबूत रखना आवश्यक है।

परभणी की इस घटना में केंद्रीय निरीक्षकों की जांच के दौरान मोबाइल फोन में प्रश्नपत्र की तस्वीर मिलना बताता है कि परीक्षा प्रक्रिया की निगरानी कितनी महत्वपूर्ण है। समय रहते कथित अनियमितता का पता चलने से मामले को आगे बढ़ने से रोकने में मदद मिली।

जांच के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर

फिलहाल पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ मामला दर्ज किया है। हालांकि, कथित परीक्षा अनियमितता के पीछे वास्तविक उद्देश्य क्या था और प्रश्नपत्र की तस्वीर का आगे किस तरह इस्तेमाल किया जाना था, इसका पता जांच पूरी होने के बाद ही चलेगा।

पुलिस मोबाइल फोन और अन्य उपलब्ध जानकारी के आधार पर मामले की कड़ियां जोड़ने का प्रयास कर रही है। जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि प्रश्नपत्र की तस्वीर किसे भेजी गई, उसके बाद किन लोगों के संपर्क में यह सामग्री पहुंची और क्या किसी विद्यार्थी को इससे अनुचित लाभ मिलने वाला था।

परभणी में सामने आया यह मामला परीक्षा व्यवस्था में सतर्कता और पारदर्शिता की आवश्यकता को एक बार फिर रेखांकित करता है। परीक्षा केंद्र पर तैनात प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी होती है कि प्रश्नपत्र की गोपनीयता बनाए रखी जाए और सभी विद्यार्थियों को समान अवसर मिले। कथित तौर पर इसी व्यवस्था का उल्लंघन होने के बाद पुलिस कार्रवाई तक मामला पहुंचा है।

अभी जांच जारी है और आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होगी। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस मामले में प्रश्नपत्र की तस्वीर लेने और उसे आगे भेजने के पीछे क्या उद्देश्य था तथा अन्य गिरफ्तार लोगों की इसमें कितनी भूमिका थी।

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