Thursday, August 20, 2026

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4,500 SIM, 21,000 OTP से खुला इंटरनेशनल बॉस स्कैम नेटवर्क

अहमदाबाद में सामने आए करीब 1.5 करोड़ रुपये के WhatsApp-based ‘Boss Scam’ ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध नेटवर्क की परतें खोल दी हैं। अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच की जांच में पश्चिम बंगाल से दो कथित SIM और OTP सप्लायर गिरफ्तार किए गए हैं। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के जरिए उपलब्ध कराए गए हजारों मोबाइल नंबर, SIM कार्ड और OTP का इस्तेमाल भारत के अलग-अलग राज्यों में साइबर अपराधों के लिए किया गया। जांच में नेटवर्क के कथित तार भारत, चीन, पाकिस्तान और हांगकांग तक जुड़े होने की जानकारी सामने आई है।

पुलिस ने इस मामले में इमरान अली पियादा और इंजामुल मोल्ला को गिरफ्तार किया है। तकनीकी विश्लेषण के आधार पर दोनों आरोपियों को पश्चिम बंगाल से ट्रेस किया गया। पुलिस के अनुसार, इमरान अली पियादा एक टेलीकॉम कंपनी से जुड़े Point of Sale (POS) एजेंट के रूप में काम करता था और कथित तौर पर ग्राहकों के बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट का दुरुपयोग कर SIM कार्ड हासिल करता था। इन SIM कार्ड और उनसे बनाए गए WhatsApp अकाउंट को कथित तौर पर साइबर अपराधियों तक पहुंचाया जाता था।

1.5 करोड़ की ठगी से शुरू हुई जांच

मामला जून में तब सामने आया, जब अहमदाबाद के एक कारोबारी को कथित तौर पर 1.5 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। साइबर अपराधियों ने पहले खुद को RBI के अधिकारियों के रूप में पेश किया और बाद में कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों तथा मालिक की पहचान का इस्तेमाल करते हुए कंपनी के अकाउंटेंट को निशाना बनाया।

23 जून को कारोबारी के मोबाइल नंबर पर WhatsApp के जरिए एक ZIP फाइल भेजी गई। संदेश में दावा किया गया कि कंपनी के बैंक खाते में असामान्य लेनदेन पाए गए हैं और RBI के Risk Control Department की ओर से खाते पर प्रतिबंध या निलंबन लगाया जा सकता है।

इस संदेश के बाद जालसाजों ने कंपनी के मालिक या वरिष्ठ अधिकारी का रूप धारण कर अकाउंटेंट को कथित तौर पर 1.5 करोड़ रुपये एक बैंक खाते में ट्रांसफर करने का निर्देश दिया। रकम ट्रांसफर होने के बाद मामला सामने आया और पीड़ित ने साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस के अनुसार, कार्रवाई के बाद करीब 1.13 करोड़ रुपये की राशि रिकवर की जा सकी।

4,500 SIM और हजारों OTP का नेटवर्क

जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों से कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बरामद किए। इनमें ऐसे उपकरण भी शामिल थे, जिनमें एक साथ चार SIM कार्ड संचालित किए जा सकते थे।

पुलिस का आरोप है कि इमरान अली पियादा ने लगभग 4,500 SIM कार्ड साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराए। इन SIM कार्ड का इस्तेमाल अलग-अलग मोबाइल नंबर और WhatsApp अकाउंट तैयार करने के लिए किया गया। जांचकर्ताओं के अनुसार, इन नंबरों की गतिविधियों से देश के कई हिस्सों में साइबर अपराध के मामलों का पता चला।

पुलिस ने यह भी आरोप लगाया कि पियादा पिछले करीब पांच वर्षों में ई-कॉमर्स और ऑनलाइन गेमिंग एप्लिकेशन से संबंधित लगभग 21,000 OTP उपलब्ध करा चुका था। इसके बदले उसने कथित तौर पर 21 लाख रुपये से अधिक कमाए। इसके अतिरिक्त, लगभग 900 OTP WhatsApp अकाउंट एक्टिवेशन के लिए उपलब्ध कराने का आरोप है, जिससे उसे करीब 2.25 लाख रुपये से अधिक की कमाई हुई।

दूसरे आरोपी इंजामुल मोल्ला पर साइबर ठगी में शामिल लोगों के साथ समन्वय करने और मोबाइल नंबर, डमी SIM तथा WhatsApp आधारित संचार व्यवस्था उपलब्ध कराने में मदद करने का आरोप लगाया गया है।

26 राज्यों में 252 शिकायतों से जुड़े SIM

जांच का दायरा तब और बड़ा हो गया, जब पुलिस ने आरोपियों द्वारा कथित रूप से उपलब्ध कराए गए मोबाइल नंबरों की जांच की। अहमदाबाद पुलिस के अनुसार, इन करीब 4,500 SIM कार्ड से संबंधित 26 राज्यों में 252 शिकायतें सामने आई हैं।

इनमें 194 ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायतें और तीन कथित ‘Boss Scam’ मामले शामिल हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया से जुड़े अपराध, hacking और अन्य साइबर अपराधों की शिकायतें भी इन नंबरों से जुड़ी पाई गई हैं।

अहमदाबाद के पुलिस आयुक्त अनुपम सिंह गेहलोत के अनुसार, आरोपी पिछले चार से पांच वर्षों से कथित तौर पर इस तरह की गतिविधियों में सक्रिय थे। पुलिस का मानना है कि आरोपियों ने साइबर अपराधियों को केवल SIM ही नहीं, बल्कि ऐसे डिजिटल संसाधन भी उपलब्ध कराए, जिनसे बड़े पैमाने पर साइबर हमले और वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम देना आसान हुआ।

चीन, पाकिस्तान और हांगकांग से कथित कनेक्शन

जांच में सामने आए अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन ने मामले को और गंभीर बना दिया है। पुलिस के मुताबिक, Boss Scam में इस्तेमाल किए गए malware के बारे में प्रारंभिक जांच में संदेह है कि इसे चीन से जुड़े साइबर अपराधियों ने विकसित किया हो सकता है।

जांचकर्ताओं ने इस नेटवर्क से कथित रूप से जुड़े एक call centre को Islamabad में भी ट्रेस किया है। इसके अलावा, पुलिस के अनुसार, धोखाधड़ी से जुड़े बैंक खातों को चीन आधारित VPN सेवा के माध्यम से एक्सेस किए जाने के संकेत मिले हैं।

प्रारंभिक जांच में ऐसे cyber infrastructure के इस्तेमाल की बात सामने आई है, जो चीन, भारत, पाकिस्तान और हांगकांग से संबंधित बताया जा रहा है। हालांकि, इन अंतरराष्ट्रीय कड़ियों की पूरी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

मामले में Indian Cybercrime Coordination Centre (I4C) और अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच मिलकर अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की जांच कर रहे हैं।

Cybercrime-as-a-Service मॉडल पर काम करने का आरोप

पुलिस के अनुसार, यह नेटवर्क कथित तौर पर “Cybercrime-as-a-Service” मॉडल पर काम कर रहा था। इस मॉडल में साइबर अपराधियों को खुद सभी तकनीकी संसाधन तैयार करने की जरूरत नहीं होती। उन्हें SIM कार्ड, OTP, WhatsApp अकाउंट और अन्य डिजिटल infrastructure जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, जिनका इस्तेमाल बाद में ठगी या अन्य साइबर अपराधों के लिए किया जा सकता है।

इस मामले में आरोपियों की भूमिका कथित तौर पर इसी तरह की डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध कराने की थी। इससे विभिन्न देशों और स्थानों पर मौजूद अपराधियों के लिए भारतीय मोबाइल नंबरों और डिजिटल अकाउंट का इस्तेमाल कर अपनी पहचान छिपाना आसान हो सकता था।

कैसे काम करता है Boss Scam?

‘Boss Scam’ को CEO Impersonation Fraud भी कहा जाता है। इसमें साइबर अपराधी किसी कंपनी के CEO, निदेशक या वरिष्ठ अधिकारी की पहचान का इस्तेमाल करते हैं। कई मामलों में वे RBI, SEBI या अन्य नियामक संस्थाओं के अधिकारी बनकर भी कर्मचारियों पर दबाव डालते हैं।

अहमदाबाद मामले में कथित तौर पर WhatsApp के माध्यम से malicious ZIP file भेजी गई। पुलिस के अनुसार, इन फाइलों में .exe और .dll files शामिल थीं। ऐसी फाइलें डिवाइस में malicious software सक्रिय करने और सिस्टम से संवेदनशील जानकारी हासिल करने के लिए इस्तेमाल की जा सकती हैं।

इसके बाद अपराधी कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी या CEO की पहचान का इस्तेमाल करके finance या accounts department के कर्मचारियों को तत्काल रकम ट्रांसफर करने का निर्देश दे सकते हैं। वरिष्ठ अधिकारी के नाम और धमकी या जल्दबाजी का माहौल पैदा करने से कर्मचारी आदेश को वास्तविक मान सकता है।

10,000 से अधिक डिवाइस की जांच और कार्रवाई

अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने जांच के दौरान 10,000 से अधिक laptops और mobile phones समेत अन्य डिवाइस को secure या deactivate करने की कार्रवाई की। पुलिस के मुताबिक, ये डिवाइस संभावित रूप से Boss Scam नेटवर्क से जुड़े हो सकते थे।

पुलिस का मानना है कि समय रहते इन डिवाइस के खिलाफ कार्रवाई से भविष्य में करोड़ों रुपये की संभावित साइबर ठगी को रोका जा सकता है।

अहमदाबाद का यह मामला दिखाता है कि आधुनिक साइबर ठगी केवल एक व्यक्ति या एक कॉल सेंटर तक सीमित नहीं रह गई है। SIM कार्ड, OTP, WhatsApp अकाउंट, malware, VPN और अंतरराष्ट्रीय cyber infrastructure को जोड़कर एक संगठित नेटवर्क तैयार किया जा सकता है। जांच आगे बढ़ने के साथ पुलिस को इस कथित नेटवर्क में शामिल अन्य आरोपियों, विदेशी ऑपरेटरों और तकनीकी infrastructure के बारे में और जानकारी मिलने की उम्मीद है।

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